Advertisement

स्मृति शेष : राजनीति का सहज, सरल पहलवान नहीं रहा

जन्म : 20 जून 1950
मृत्यु : 3 अगस्त 2026

Advertisement

राजनीति में अक्सर व्यक्ति पद और प्रभाव के कारण पहचाने जाते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी पहचान उनका व्यवहार होता है। पारस जी ऐसे ही जननेता थे। कुश्ती के शौकीन पारस जी में पहलवान सी दृढ़ता थी तो एक संत सी सहजता भी थी। पहलवानी ने उन्हें अनुशासन, साहस, संघर्ष दिए थे तो आरएसएस की शाखा ने संस्कार। राजनैतिक मतभेदों के बीच भी उन्होंने कभी भी गरिमा नहीं खोई। उनका विनम्र और सौम्य स्वभाव और सबको सम्मान देने का भाव उन्हें सबसे अलग बनाता था।

पारस जी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी थी। वह छह बार विधायक, चार बार मंत्री रहे लेकिन अहंकार कभी भी उन्हें छू तक नहीं पाया। वह सबसे सहजता से मिलते थे, धैर्यपूवर्क सबको सुनते थे और जो काम कानूनी रूप से सही नहीं होता था, उसके लिए साफ तौर पर मना भी कर देते थे। आज के समय में राजनीति में शोर और दिखावा ही चर्चा का विषय होता है लेकिन पारस जी का राजनैतिक जीवन यह संदेश देता है कि लोगों के दिलों में स्थान विनम्रता, आत्मीयता, सरल जीवनशैली से बनता है।

Advertisement

आज वह हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी मुस्कुराती छवि, अपनापन और सादगी की अमिट पहचान सालों तक लोगों की स्मृतियों में रहेगी। भाजपा की स्थानीय राजनीति में आज बड़ा शून्य पैदा हो गया है।

दिवाकर नातू
पूर्व नगर अध्यक्ष भाजपा एवं
पूर्व सिंहस्थ
प्राधिकरण अध्यक्ष

Advertisement

पारस जी की सादगी बेमिसाल थी
पारस जी की सादगी बेमिसाल थी। वह हर कार्यकर्ता की बात सुनते थे। पद का अहंकार उन्हें कभी नहीं रहा। उनका यंू जाना बहुत अखर रहा है। ईश्वर उन्हें मोक्ष और परिवार को दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करें।
डॉ. मोहन यादव, सीएम मध्यप्रदेश

बेमिसाल नेता : जन समस्या के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना देने से भी गुरेज नहीं

उज्जैन। उज्जैन उत्तर से छह बार के विधायक और चार बार के मंत्री पारस जैन के दु:खद निधन से भाजपा में शोक है। स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि वह बेमिसाल नेता थे और जनसमस्याओं के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने देने से भी नहीं चूकते थे।

बेहद शोक में हूं: पारस जी को मैंने बचपन से देखा है। वह सादगी और विनम्रता के पर्याय थे। वह स्पष्टवादी थे। आम कार्यकर्ता और जनता के लिए वह हमेशा खड़े रहते थे।
– अनिल फिरोजिया, सांसद

उज्जैन ने एक गहरा नेता खो दिया: पारस जी मिलनसार, मधुरभाषी और संस्कारित राजनेता थे। वह बहुत गंभीर भी थे। उज्जैन ने एक बड़ा नेता खो दिया है। उनके इस तरह जाने से गहरा शोक हैं।
-बालयोगी उमेशनाथ जी, सांसद, राज्यसभा

निर्भीक और साहसी नेता चला गया: पारस जी निर्भीक और साहसी नेता थे। समाज और जनसेवा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। उनके निधन से गहरे शोक में हूं।
– अनिल जैन कालूहेड़ा

वह बेहद सहज और सरल थे: पारस जी बेहद सहज और सरल थे। एक अच्छा जननेता उज्जैन ने खो दिया। वह जननेता थे। वह कार्यकर्ताओं का हमेशा ख्याल रखते थे।उनका जाना गहरी क्षति है।
मुकेश टटवाल, महापौर

गंभीर और आम आदमी के नेता थे: पारस जी गंभीर और आम आदमी के नेता थे। कार्यकर्ताओं और संगठन के प्रति उनकी गहरी निष्ठा थी। वह लोकप्रिय थे।
-डॉ. रवि सोलंकी, अध्यक्ष यूडीए

 जननेता को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि: पारस जी जननेता थे।वह राजनीति और समाज दोनों जगह सक्रिय थे।ऐसे जननेता को मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
-ओम जैन, अध्यक्ष एमपी हाउसिंग बोर्ड

मुझे तो हमेशा ही पिता सा स्नेह दिया: पारस जी और मेरे पिता बद्रीलाल जी मंडी व्यापारी थे। दोनों कॉलेज के दोस्त भी थे। वह मुझे पुत्रवत मानते थे। वह सच्चे अर्थों में जननेता थे। भाजपा ने एक बड़ा नेता खो दिया है।
-संजय अग्रवाल, नगर अध्यक्ष भाजपा

दिल की सच्चे इंसान: पारस जी दिल के सच्चे इंसान थे। वह जनसमस्याओं को उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे, चाहे मसला अपनी सरकार का ही हो।पीपलीनाका क्षेत्र में जब जलभराव की समस्या हुई तो उन्होंने गौर सरकार के खिलाफ ही धरना दे दिया था। वह सच्चे जननेता थे।
-जगदीश अग्रवाल, पूर्व यूडीए अध्यक्ष

जनसरोकारी नेता: पारस जी जनसरोकारी नेता थे। छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी उनके पास जाने में हिचक नहीं होती थी। वह संगठन के प्रति समर्पित थे।
-सोनू गेहलोत, पूर्व नगरनिगम अध्यक्ष

बहुत आत्मीयता रही, बहुत सरल थे: पारस जी दलगत राजनीति से ऊपर थे। वह अच्छे कामों के हिमायती थी। वह मेरे ही वार्ड में रहते थे और हर काम में मेरी मदद करते थे। मैंने कई बार उनके समर्थकों को चुनाव हराया, लेकिन कभी भी राजनैतिक वैमनस्यता उन्होंने नहीं दिखाई। मुझे बड़ा दु:ख है कि मैं एक मांगलिक कार्य के कारण उनकी शवयात्रा में दाखिल नहीं हो पा रहा हूं।
-रवि राय, नेता प्रतिपक्ष कांगेस

उज्जैन के लिए बहुत बड़ी क्षति: पारस जी का जाना उज्जैन के लिए बहुत बड़ी क्षति है। दलगत राजनीति से वह ऊपर थे। उन्होंनेे कभी भी काम को राजनीति में नहीं बांटा।
-मुकेश भाटी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें