खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग पर फिलहाल रोक, अन्य धर्मस्थलों पर अब कार्रवाई मुश्किल
पुजारी ने दी थी कंडीशनल स्वीकृति

मंदिर में दर्शन करने वालों की भीड़ बढ़ी, महाकालेश्वर, कालभैरव आने वाले श्रद्धालु भी जा रहे हैं अब खड़े हनुमान मंदिर
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कंठाल चौराहा- नईसड़क मार्ग चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन का मामला फिलहाल निगम प्रशासन ने होल्ड पर डाल दिया है। हालांकि यह प्रक्रिया रुकने का असर दूसरे मार्गों के चौड़ीकरण में आ रहे धर्मस्थलों के हटाने पर पडऩे की आशंका है। इधर, मंदिर के पुजारी ने कहा है कि उन्होंने मंदिर विस्थापन की स्वीकृति कंडीशनल दी थी। उनकी 8 शर्तों में से सिर्फ एक पूरी की गई। शेष के बारे में कोई जवाब नहीं दिया गया।
दरअसल, खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन का मामला आठ दिन से सुर्खियों में है। एक समय में मंदिर के विस्थापन की तैयारी पूरी हो गई थी, पुजारी महेश बैरागी ने भी स्वीकृति दे दी थी, अब वे कह रहे हैं कि उन्होंने कंडीशनल मंजूरी दी थी।
पुजारी ने आठ बिंदुओं का लेटर किया जारी
पुजारी महेश बैरागी ने कंडीशनल स्वीकृति का लेटर सार्वजनिक किया है। इसमें आठ बिंदू लिखे गए हैं।
1 मंदिर को विस्थापित कर नई जगह स्थापित किया जाना है, उस स्थल की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
2 प्रस्तावित स्थल का स्वामित्व नगर निगम का होने का साक्ष्य उपलब्ध कराएं ताकि भविष्य में भूमि के संबंध में कोई विवाद उत्पन्न नहीं हो।
3 खड़े हनुमान जी की मूर्ति की सुरक्षा, विधि-विधान से स्थानांतरण और पुन:स्थापना की निगम की योजना की जानकारी दी जाए।
4 नवनी मंदिर के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि, भवन, गर्भगृह, पूजा स्थल, श्रद्धालुओं के आवागमन, एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं और मंदिर निर्माण का व्यय नगरनिगम वहन करे।
5 मंदिर के साथ पूर्व में स्थित 4 दुकानों को हटाने से परिवार की जीविका प्रभावित हुई है, ऐसे में दुकान की क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।
6 नवीन मंदिर के निर्माण में मंदिर की सुरक्षा, संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा की समुचित व्यवस्था की जाए और लिखित रूप से अवगत कराया जाए।
7 मंदिर के विस्थापन के नगरनिगम की सारी पुर्नस्थापन योजना, प्रस्तावित स्थल के स्वामित्व के दस्तावेज, निर्माण एवं समयबद्ध कार्ययोजना मुझे उपलब्ध कराई जाए। मंदिर में पूजन के लिए पानी की उचित व्यवस्था की जाए।
8 खड़े हनुमान मंदिर के निर्माण की विधिवत अनुमति 1969 में दुकान एवं प्याऊ के साथ दी गई थी। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद 6 दिसंबर 1994 को मंदिर का जीर्णोद्वार, मंदिर परिसर की दुकानों की मरम्मत एवं आवश्यक निर्माण कार्य कराए गए थे। वह आवेदन के साथ लगाए गए हैं।
लेटर में पुजारी ने सबसे ज्यादा जोर दुकानों के हटाए जाने से परिवार की जीविका प्रभावित होने पर दिया है।
सू त्रों के मुताबिक नगरनिगम ने पुजारी की करीब-करीब सारी शर्तें मान ली थीं लेकिन मामला दुकानों के मुआवजे पर आकर अटका हुआ था। इस संबंध में निगम के अफसर कोई लिखित दस्तावेज देने की स्थिति में नहीं थे, ऐसे में पेंच फंसा हुआ था। जब पिछले गुरुवार को मंदिर से गुंबद हटाने की कार्रवाई शुरू हुई तो माहौल विस्थापन विरोधी बन गया। पुजारी महेश बैरागी कहते हैं कि उन्होंने 8 कंडीशन में ही मंदिर विस्थापन की अनुमति दी थी। निगम प्रशासन ने 8 में से सिर्फ एक शर्त ही मानी है, यह शर्त मंदिर के स्वामित्व के कागज की पूरी की गई है। शेष शर्तें नहीं मानी गई हैं।
ई-रिक्शा चालकों ने नया पाइंट जोड़ा
खड़े हनुमान को सोशल मीडिया ने देश-दुनिया में वायरल कर दिया है। इसका असर यह है कि श्री महाकालेश्वर और कालभैरव के दर्शन करने आने वाले लोगों में से 25 फीसदी खड़े हनुमान मंदिर भी दर्शन के लिए आ रहे हैं। ई-रिक्शा और ऑटोचालकों ने उज्जैन दर्शन के अपने पाइंट में खड़े हनुमान मंदिर को भी शामिल कर लिया है।
मंदिर का चढ़ावा बढ़ा, गिनती नहीं
दर्शनार्थियों की संख्या बढऩे का असर मंदिर के चढ़ावे पर भी पड़ा है। यह पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। हालांकि पुजारी महेश बैरागी कहते हैं कि उन्होंने चढ़ावे की गिनती नहीं की है लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण इसमें इजाफा होने की बात वह स्वीकार करते हैं।
विहिप पदाधिकारी ने गाई रामधुन
विहिप के केंद्रीय सह मंत्री दादा भार्गव गुरुवार रात मंदिर पहुंचे और दर्शन कर रामधुन गाई। गुरुवार को ही मंदिर के बाहर युवाओं ने सुंदरकांड भी किया। शुक्रवार को आलोट के विधायक और पूर्व सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय भी दर्शन करने पहुंचे।
पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने लिखा पत्र
पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें मंदिर का विस्थापन नहीं करते हुए वैकल्पिक उपाय करने का सुझाव दिया गया है। भारती ने कमलापति रेलवे स्टेशन का उदाहरण भी दिया है।
निगम ने सारी कार्रवाई रोकी
निगम ने मंदिर विस्थापन से जुड़ी सारी कार्रवाई फिलहाल रोक दी है। आईआईटी टीम के मंदिर मुआयने को टाल दिया गया है। इधर विस्थापन टलने का असर चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे अन्य धर्मस्थलों पर पडऩे की आशंका भी है। निगम चार बड़े धर्मस्थलों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा था। आशंका है कि इन धर्मस्थलों को हटाने में अब दिक्कत पैदा होगी।
अब तक 40 से ज्यादा धर्मस्थल हटे, बवाल सिर्फ यहीं क्यों ?
शहर में चल रहे चौड़ीकरण काम में अब तक 40 से ज्यादा धर्मस्थलों का विस्थापन आसानी से हो चुका है। यहां की प्रतिमाओं को एक ही जगह स्थापित भी किया जा चुका है। पर कहीं से भी विरोध के स्वर नहीं उठे। कंठाल चौराहा-छत्रीचौक चौड़ीकरण में ही संकटमोचन हनुमान और चिंताहरण गणेश जी का विस्थापन भी आसानी से हुआ। कांग्रेस के नेताओं ने खुद इन मंदिरों को शिफ्ट करने में मदद की, लेकिन खड़े हनुमान मंदिर पर आकर मामला उलझ गया है। यहां आकर मामला क्यों उलझा यह सवाल आम आदमी के बीच चर्चा का विषय है। इसे लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं।









