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पयुर्षण पर्व विशेष: पर्युषण में क्षमापना का सूत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण

प र्युषण पर्व के महत्वपूर्ण सूत्रों में से क्षमापना का सूत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण है। क्षमा कायरों का नहीं वीरों का भूषण है। क्षमा का जीवन में समावेश नई स्फूर्ति को सौंपता है। क्षमा महान धर्म है। संसार के सभी धर्मशाों ने क्षमा की महत्ता बताई है। इस धरा पर जितने भी महापुरुष हुए हैं उन सबने जीवन में क्षमा धर्म को साकार किया है। भगवान महावीर, बुद्ध, श्रीकृष्ण, ईसा, मोहम्मद आदि सभी महापुरुषों और पूज्य संतों के निर्मल चरित्रों में ऐसे बहुत से प्रसंग हैं जो उनकी महान क्षमा के हमें दर्शन करवाते हैं।

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ऋतु चक्र की एक ऋतु का नाम है पर्युषण : पर्युषण शब्द का अर्थ जान लेने की आवश्यकता है। यह ऋतु चक्र की एक ऋतु का नाम है जिसे ग्रीष्म, निदाघ आदि कहते हैं। जब मेघमाला आकाश से संतप्त वसुधा पर अपनी तुषार जलधाराएं छोडऩा प्रारंभ करती है और जब वृष्टि की प्रक्रिया विराम लेकर शांत हो जाती है इस समयावधि को पर्युषण ऋतु कहते हैं। अन्य ऋतुओं की तरह पर्युषण भी एक ऋतु है। एक वर्ष में छह ऋतुओं का चक्र प्रवर्तन होता है।

जीवन का विकार है सुषुप्ति, इसे हटाना जरूरी: आगमों में पर्युषण के लिए पज्जूसण शब्द का उपयोग किया गया है। प्राकृत शैली में जैसे उष्ण के लिए उसिण शब्द बोला जाता है उसी तरह पर्युषण के लिए पज्जूसण का उपयोग किया जाता है। यह पर्व उत्सव का वेश धारण कर प्रतिदिन आकाश से पृथ्वी पर अवतीर्ण होता है परंतु इस प्राकृतिक आह्लाद को हम अपनी अनुभूति में नहीं उतार पाते क्योकि हमारी चेतना सुप्त है।

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पर्युषण पर्व के मूल स्वर को आत्मसात करें: वैदिक ऋचाओं का सूर्य कभी सोता नहीं हमेशा जागता रहता है। वह संसार को भी जगाता रहता है। पर्युषण पर्व के मूल स्वर को यदि व्यक्ति जीवन में आत्मसात कर ले तो जीवन में नए आनंद का अखंड साम्राज्य स्थापित हो सकता है। परंतु ऐसा करने के बजाय लोग केवल पर्व को केवल औपचारिक रूप से मनाते हैं इससे लाभ की संभावना नहीं रहती।
डॉ. विजयाश्रीजी
चातुर्मास : श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नयापुरा

विद्यासागर जी की चरण शोभायात्रा निकली

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उज्जैन। श्रीशांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर विनोदमिल में रविवार को आचार्य विद्यासागरजी महाराज के चरण विराजित किए गए। प्रतीक चौधरी ने बताया मुख्य अतिथि कुश्ती संघ अध्यक्ष नारायण यादव, नवनिर्वाचित ट्रस्टी अशोक जैन मुन्ना थे। कार्यक्रम में नरेंद्र सोगानी, मनोज बोहरा, उदित बडज़ात्या का सम्मान किया गया। इस अवसर पर राजेश जैन, सुरेंद्र सिंघई, सुबोध जैन, राजेंद्र सिंघई, आशीष गोहिल, तरुण जैन भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सुनील जैन ने किया।

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