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षष्ठी का श्राद्ध देता है स्वास्थ्य आरोग्यता

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। षष्ठी श्राद्ध से स्वास्थ्य आरोग्यता का फल मिलता है। इस तिथि को भगवान कार्तिकेय का स्मरण करना चाहिए। षष्ठी तिथि उन पितृों लिए हैं जिनकी मृत्यु इस दिन हुई हो। इस दिन मामा-मौसी का श्राद्ध भी किया जाता है। यह श्राद्ध करने से स्वास्थ्य आरोग्यता का फल मिलता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैवाहिक या पारिवारिक जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे लोगों को षष्ठी का श्राद्ध जरूर करना चाहिए। इससे परिवार में मान-सम्मान और सुख-शांति बनी रहती है। षष्ठी तिथि के स्वामी कार्तिकेय हैं।

षष्ठी तिथि 1 अक्टूबर दिन गुरुवार

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मुहूर्त समय
कुतुप मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 तक
रोहिण मुहूर्त दोपहर 12:42 से 1:30 बजे तक
अपराह्न काल दोपहर 1:30 से 3:53 बजे तक

यह करें: भगवान कार्तिकेय का स्मरण कर छह कन्याओं को मीठे फल और खिलौने दान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इस दिन सरसों के तेल का प्रयोग नहीं करें।

कल से श्राद्ध की सारी तिथियां अलग-अलग: तिथियों के कारण एक दिन में दो श्राद्ध की स्थिति 1 अक्टूबर से खत्म हो जाएगी। इस दिन से हर तिथि पर एक ही श्राद्ध होगा।

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तारीख श्राद्ध
1 अक्टूबर षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या

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