66 करोड़ रुपए का बैंक लोन फर्जीवाड़ा, रुचि ग्लोबल पर ईडी का शिकंजा

फर्जी बिलों के जरिए घुमाई गई बैंकों की रकम… उमेश शाहरा समेत 21 आरोपियों और संस्थाओं को नोटिस
अक्षरविश्व न्यूज इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड (वर्तमान में एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड) से जुड़े करीब 66 करोड़ रुपए के बहुचर्चित बैंक लोन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कस दिया है। एजेंसी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट में औपचारिक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चालान) पेश कर दी है। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कंपनी से जुड़े 21 आरोपियों और संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए तलब किया है।
मामले की जड़ें सीबीआई भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ी हैं, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पड़ताल शुरू की थी। जांच में सामने आया कि रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू-कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन-फंड बेस्ड क्रेडिट यानी लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) सुविधाएं हासिल की थीं। आरोप है कि सहयोगी फर्मों के जरिए कृषि उत्पाद खरीदने के नाम पर फर्जी ‘बिल ऑफ एक्सचेंजÓ और नकली ‘लॉरी रसीदेंÓ तैयार की गईं। बैंकों से बिल डिस्काउंट कराने के बाद यह पूरी रकम महज एक से तीन दिन के भीतर कई खातों से घुमाते हुए वापस रुचि ग्लोबल में ट्रांसफर कर ली गई।
पत्नी के नाम की जमीन कुर्क 23.50 लाख की नकदी जब्त
बैंक क्रेडिट की हेराफेरी से हासिल रकम को संपत्तियां खरीदने में खपाया गया था। तलाशी अभियान के दौरान 23.50 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त कर बैंक खाते फ्रीज किए गए थे। इसके बाद एजेंसी ने 5.13 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां कुर्क कीं, जिसमें कंपनी से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम दर्ज जमीन भी शामिल है। सीबीआई की मूल शिकायत में बैंकों के समूह को 188.35 करोड़ रुपए के नुकसान का हवाला दिया गया था। फिलहाल विशेष अदालत द्वारा 21 आरोपियों को नोटिस जारी करने के बाद एजेंसी फंड ट्रेल की बाकी कडिय़ों को खंगालने में जुटी है।









