आस्था का रैला : सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा तट पर उमड़ा सैलाब

त्रिवेणी पर फव्वारा स्नान, सिद्धवट पर तर्पण
भीड़ के कारण उन्हेल और इंदौर रोड पर रुक-रुककर चला ट्रैफिक
रात मंदिर में हुई शनिदेव की पूजा
अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। गजछाया योग के दुर्लभ संयोग के साथ आई सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या पर उज्जैन में मां शिप्रा के तटों पर आस्था उमड़ पड़ी। सिद्धवट और त्रिवेणी पर भीड़ इस कदर थी कि उन्हेल और इंदौर रोड पर रुक-रुककर जाम लगता रहा। त्रिवेणी पर नर्मदा के पानी से फव्वारों के सहारे श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। सिद्धवट पर मां शिप्रा के गंदे पानी में ही उन्होंने तर्पण किया।
दरअसल, लंबे समय बाद अश्विन मास में सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या आई है। यह इस मायने में भी खास है कि इस अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने वाला गजछाया योग भी है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य और चंद्र की विशेष कला एवं विशेष अंश में होने से गजछाया योग में पितृकर्म करना विशेष फलदायी होता है। इस दिन पितृ कर्म करने से सुख, समृद्धि, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आस्था के लिए जाना जाने वाला सनातनी समाज इसके चलते बड़ी संख्या में सिद्धवट और त्रिवेणी पहुंचा।
रात मंदिर में हुई शनिदेव की पूजा
त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में रात में ही शनिदेव का पूजन-अभिषेक किया। उनका विशेष शृंगार भी हुआ। देर रात से ही स्नान का सिलसिला शुरू हुआ और सुबह ८ बजे तक काफी भीड़ रही। फव्वारे में नर्मदा जल से लोग स्नान करते रहे। हालांकि इसके बाद भीड़ कम होनी शुरू हो गई। लोग दोपहर तक स्नान करते रहे और अपने आराध्य से कृपा की प्रार्थना करते रहे।
गंदे पानी में ही तर्पण
तर्पण करते सिद्धवट और गयाकोठा पर भी सर्वपितृ अमावस्या के कारण बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यहां भी सुबह से तर्पण का सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि यहां शिप्रा का पानी खराब था, बावजूद इसके लोग आस्था की डुबकी लगाते रहे, अपने पितरों के लिए तर्पण करते रहे।
नाजिया ने किया तर्पण
सुप्रीम कोर्ट की वकील नाजिया इलाही खान ने रामघाट पर तर्पण और पिंडदान किया। वह सुबह करीब ११ बजे यहां पहुंची थीं। अजय जोशी ने पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया पूरी करवाई।
रामघाट पर भी श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे
रामघाट पर भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्नान करने पहुंचे। यहां भी मिनी सिंहस्थ सा नजारा दिखा। यहां लोगों ने स्नान के साथ तर्पण भी किया।









