ओपन मार्केट में सोयाबीन के अच्छे भाव इसलिए भावांतर से किसानों ने बनाई दूरी

शुरुआती बारिश से सोयाबीन की उपज बेहतर, किसान खुश, भावांतर में उपज बेचने में रुचि नहीं
जिले में सिर्फ 1664 पंजीयन, पिछले साल की तुलना में सिर्फ 1.49 फीसदी ने ही करवाया पंजीयन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अगर उपज के दाम सही मिले तो किसानों को सरकारी योजनाओं की जरूरत नहीं है। यह साबित हो रहा है इस बार मंडियों में बिक रही सोयाबीन उपज से। ओपन मार्र्केट में अच्छी कीमत मिलने के कारण किसान इस बार भावांतर के जरिये फसल बेचने के इच्छुक नहीं हैं और इस साल महज 1.49 फीसदी किसानों ने ही भावांतर में रजिस्ट्रेशन कराया है।
दरअसल, इस साल ओपन मार्केट में सोयाबीन के भाव अच्छे मिल रहे हैं। इसकी वजह है जिले में सोयाबीन का गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन। ऐसे में व्यापारी फसल का अच्छा दाम दे रहे हैं। इसका असर सरकार की भावांतर भुगतान योजना पर दिखाई दे रहा है, पिछले साल भावांतर योजना के जरिये उपज बेचने के लिए 1,11,779 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इस बार यह संख्या घटकर सिर्फ 1664 ही रह गई। अगर इसे फीसदी में निकाले तो महज 1.49 फीसदी किसानों ने भावांतर के जरिये उपज बेचने में रुचि ली है।
क्यों बदला ट्रेंड
दरअसल, पिछले 3-4 सालों से किसान सोयाबीन के दाम को लेकर काफी परेशान थे। हाल यह था कि बेस्ट क्वालिटी की सोयाबीन को भी अच्छे दाम नहीं मिल रहे थे। किसानों के नुकसान की भरपाई करने के लिए सरकार ने पिछले साल सोयाबीन को भावातंर योजना में शामिल किया था।
पिछले साल सोयाबीन के भाव 4000 से 4500 के बीच थे और तब किसानों ने भावातंर योजना में बढ़-चढ़ कर भागीदारी की थी।
इस बार सोयाबीन तेल के दाम बढ़े हैं, और प्लांट से मांग भी खूब है। ऐसे में सोयाबीन की कीमत बढ़ी हुई है। मौजूदा समय में भाव 7300 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं।
भावातंर योजना में सोयाबीन का एमएसपी 5708 रुपए ही है। ऐसे में किसानों का झुकाव ओपन मार्केट की ओर है।
भाव अच्छे मिलने से किसानों की रुचि कम
कृषि विभाग के सहायक संचालक कमलेश राठौर कहते हैं कि ओपन मार्केट में सोयाबीन के दाम एमएसपी से ज्यादा है। इस वजह से किसानों ने भावांतर योजना मेंं पंजीयन कराने में कम रुचि ली है। इस साल सोयाबीन का उत्पादन भी अच्छा है और दाम भी बेहतर हैं। ऐसे में किसान खुले बाजार में ही सोयाबीन बेच रहे हैं।
इधर मंडी में कतार एक दिन पहले पहुंच रहे किसान
फिलहाल चिमनगंज कृषि उपज मंडी में उपज बेचने वाले किसानों की भीड़ दिख रही है। हाल यह है कि किसान उपज बेचने के लिए एक दिन पहले ही मंडी पहुंच रहे हैं, क्योंकि सुबह तक सोयाबीन के फड़़ (विक्रय स्थल) फुल हो जाते हैं। सुबह मंडी आने वाले किसानों के उपज की नीलामी दोपहर बाद होती है।









