नए टाइगर रिजर्व में ट्रेंक्यूलाइज विशेषज्ञ तक नहीं, टीम के इंतजार में 18 घंटे तड़पता रहा घायल बाघ

अक्षरविश्व न्यूज सागर। सागर में नेशनल हाईवे-44 पर गुरु चौपड़ा के पास रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजे बाघ को वाहन ने टक्कर मार दी। देर रात में ही वन विभाग की टीम ने सर्चिंग की, लेकिन बाघ नहीं दिखा। सोमवार सुबह लोगों ने घायल बाघ को देखा और वन विभाग को सूचना दी। टीम के साथ अफसर मौके पर पहुंचे।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू टीम बुलाई गई, लेकिन यह दल इतना सक्षम नहीं था कि बाघ को ट्रेंक्युलाइज कर पाए, लिहाजा पन्ना टाइगर रिजर्व व जबलपुर से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई। इस तरह 18 घंटे बाद घायल बाघ को प्राथमिक इलाज मिल पाया। पन्ना से शाम 6 बजे टीम पहुंची और 7.30 बजे उसे ट्रेंक्युलाइज करने के बाद भोपाल वन विहार रवाना किया गया। इसी जगह साल 2024 में वाहन की टक्कर से एक तेंदुए की मौत भी हो गई थी।
राहगीरों ने बाघ को लंगड़ाते हुए देखा
सोमवार सुबह 7-8 बजे कुछ राहगीरों ने एक बाघ को हाईवे से लगे जंगल में लंगड़ाते हुए जाते देखा। भीड़ देखकर बाघ पत्थरों के पीछे छिपकर बैठ गया। वहां से कुछ दूर चला और एक पेड़ के नीचे बैठ गया। पिछले पैरों की हड्डी में चोट की वजह से वह चल नहीं पा रहा था। सड़क पार करते वक्त किसी भारी वाहन ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू दल के साथ सीसीएफ रिपुदमन सिंह व डीएफओ वरुण यादव टीम के साथ पहुंचे।
गौरझामर व ढाना रेंज से वन विभाग की टीम बुलाई गई। ढाना रेंजर राघवेंद्र चौहान ने बताया कि पन्ना से आए रेस्क्यू दल ने बाघ को ट्रेंक्युलाइज करके प्राथमिक इलाज किया। वाहन से बाघ को इलाज के लिए भोपाल रवाना किया है।
8 माह पहले ढाना रेंज में मिला था बाघ का शव
दक्षिण वन मंडल की ढाना रेंज में इसके पहले एक बाघ का शव मिला था। बाघ को ट्रैक्टर-ट्रॉली से दूसरी जगह फेंका गया था। उसकी करंट लगने से मौत की बात सामने आई थी। यह पूरा मामला शिकार से जुड़ा था, लेकिन इसकी जांच दबा दी गई।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मृदुल मिश्रा ने बताया कि जिले में 7 नए अंडरपास की प्लानिंग है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मालथौन व देवरी, गौरझामर जैसे जंगल एरिया से लगे फोरलेन किनारे फेंसिंग करा रहे हैं। बरकोटी घाटी पर अंडरपास के लिए जगह का सर्वे करा लेंगे।








