बायपास रेललाइन का सर्वे करने वाली टीम की घेराबंदी, खाली लौटी

दिवाली बाद टीम जाएगी फिर से सर्वे करने
उज्जैन। इंदौर से नागदा ट्रैक को जोडऩे वाली चिंतामन-नईखेड़ी रेलवे बायपास लाइन का सर्वे करने गई प्रशासन एवं रेलवे की टीम को शुक्रवार को मंगरोला के किसानों ने खाली हाथ वापस लौटा दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक मुआवजे का निर्धारण नहीं होता, वह सर्वे नहीं करने देंगे। अब दिवाली बाद टीम फिर से जाएगी।
दरअसल, 189 करोड़ की लागत से रेलवे बायपास योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत इंदौर से आने वाली ट्रेन को नागदा की तरफ मोड़ा जा सकेगा। इसका फायदा यह होगा कि कई ट्रेन को उज्जैन तरफ नहीं आना होगा। खासकर गुड़्स ट्रेन को। यह ट्रेन सीधे नागदा की तरफ चली जाएंगी। 8.60 किलोमीटर लंबे बायपास को सिंहस्थ के पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके दायरे में पांच गांव की जमीन आ रही हैं।
अलाइनमेंट को लेकर किसान नाराज
किसान रेलवे लाइन के अलाइनमेंट को लेकर नाराज हैं। अब तक पांच बार यह बदला जा चुका है। दाउदखेड़ी, चिंतामन, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बे के 85 किसानों की जमीन रेलवे लाइन के दायरे में आ रही है। इन गांवों में जमीन की गाइडलाइन भी अलग-अलग है। मोहनपुरा, चिंतामन में एक बीघा जमीन की गाइडलाइन 80 लाख से 1.5 करोड़ है तो मंगरोला में सिर्फ 15 लाख। मंगरोला के किसानों को डर है कि उनका नुकसान बहुत अधिक होगा, इसीलिए वे विरोध कर रहे हैं।
मंगरोला के श्यामसिंह ने बताया कि अलाइनमेंट फाइनल नहीं होने से अभी यह तय नहीं कि किस किसान की कितनी जमीन जा रही है। बार-बार रूट बदलने से असमंजस है। जमीन का मुआवजा क्या होगा, यह भी तय नहीं है। चूंकि मंगरोला में जमीन की गाइडलाइन कम और बाजार भाव बहुत ज्यादा है, ऐसे में किसान अपना नुकसान क्यों करेंगे ? इसीलिए विरोध किया है।
किसानों ने सर्वे करने से रोका, अब दिवाली बाद देखेंगे
रेलवे अफसरों के साथ रेललाइन के दायरे में आ रही परिसंपत्तियों का मूल्य निर्धारण करने गए थे। इसमें जमीन, मकान, ट्यूबवेल, चाहरदीवारी, फेसिंग, पेड़, पौधे के आधार पर मूल्य तय होना था। किसान कह रहे थे कि पहले मुआवजा बताओ। मुआवजे का निर्धारण परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के बाद ही तय होता है। फिलहाल लौट आए हैं। दिवाली बाद फिर से जाएंगे, या किसानों को बुलाएंगे।
दीप्ति मांझी, नायब तहसीलदार, उज्जैन ग्रामीण









