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बाबा महाकाल के खजाने में 472 करोड़ की एफडी व 90 एकड़ जमीन

चांदी की चमक से चमका बाबा का खजाना

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श्रद्धालुओं ने सालभर में रिकार्डतोड़ 592 किलो चांदी और डेढ़ किलो सोना भेंट किया 

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। भगवान महाकाल का खजाना चांदी की चमक से चमका है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर बाबा को चांदी के आभूषण भेंट किए। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और भक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे वर्ष (२०२५-२६) में मंदिर को दान स्वरूप 592.36 किलोग्राम चांदी और 1.48 किलोग्राम सोना दान में मिला है। इस वर्ष मंदिर के खजाने में चांदी के दान ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में चांदी का दान करीब 193 किलोग्राम अधिक दर्ज किया गया है। भक्तों द्वारा चांदी के अर्पण में आया यह बदलाव अपने आप में एक बहुत बड़ा उछाल माना जा रहा है।

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सोने का दान लगभग स्थिर

एक तरफ जहां चांदी के दान ने नया रिकॉर्ड बनाया, वहीं दूसरी तरफ सोने का दान लगभग पिछले साल के आसपास ही स्थिर रहा। चांदी की तुलना में इस वर्ष सोने के दान में बेहद मामूली कमी देखी गई है, लेकिन इसके बावजूद कुल आंकड़ा डेढ़ किलो (1.48 किलोग्राम) के करीब पहुंच गया है जो कि एक बड़ी मात्रा है।

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४७२ करोड़ रुपए की एफडी है मंदिर के पास

श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति के खजाने और उसकी स्थायी संपत्तियों की अब तक के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक समिति के पास करीब 472 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और लगभग 90 एकड़ बेशकीमती जमीन है। 472 करोड़ की यह भारी-भरकम एफडी यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया में जमा है। इसके अलावा, मंदिर के रोजमर्रा के प्रबंधन, कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न बैंक खातों में करीब 16 करोड़ रुपए की नकद राशि भी मौजूद है। दूसरी तरफ, उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हुए अप्रत्याशित इजाफे के कारण मंदिर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने का वार्षिक खर्च भी तेजी से बढ़ा है, जो अब करीब 135 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच गया है।

पिछले साल के मुकाबले 27 करोड़ अधिक दान

मंदिर समिति को वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के दौरान जो 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, वह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए अधिक है।

सोने-चांदी के कुल भंडार पर सस्पेंस बरकरार

महाकाल मंदिर को दान में मिले सोने और चांदी को लेकर हाल ही में काफी चर्चाएं रही हैं। हालांकि, मंदिर के पास कुल कितने क्विंटल या किलो सोना-चांदी जमा है, इसकी सही और सटीक मात्रा को मंदिर समिति ने आधिकारिक तौर पर अभी भी गुप्त रखा है।

चांदी का चढ़ावा अधिक क्यों

रौप्यं चन्द्रस्य द्रव्यं स्यात् -ज्योतिषी पं. रामचंद्र नायक ने बताया मन के स्वामी चंद्रमा को भगवान शिव मस्तक पर धारण करते हैं। चांदी चंद्र की धातु है इसलिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिनकी कुंडली में चंद्रमा अशुभ, कमजोर या जीरो डिग्री का होता है उन्हें भगवान शिव पर चांदी के सर्प, छत्र अर्पण एवं दूध आदि से रुद्राभिषेक करने का विधान है।

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