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इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का हुआ भूमिपूजन

मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इंदौर के सांवेर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंद्रावतीगंज में ‘इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर’ का भव्य शिलान्यास किया गया। इस भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर शामिल हुए। इनके साथ ही प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट भी विशेष रूप से मंच पर मौजूद रहे।

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कैसा होगा कॉरिडोर का रूट और क्या होंगे फायदे?

लगभग 2,935 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से तैयार होने वाला यह फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर करीब 48 किलोमीटर लंबा होगा।

  • शुरुआत और अंत: यह नया मार्ग इंदौर के प्रसिद्ध पितृ पर्वत क्षेत्र से प्रारंभ होकर उज्जैन में चिंतामन गणेश मंदिर के समीप स्थित सिंहस्थ बायपास पर जाकर जुड़ेगा।

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  • समय की बचत: इस कॉरिडोर के चालू होने से दोनों प्रमुख शहरों के बीच का सफर न केवल बेहद सुगम हो जाएगा, बल्कि यात्रा के समय में भी भारी कमी आएगी।

  • सिंहस्थ के लिए वरदान: आगामी सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय जनता को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। बाहरी राज्यों से हवाई मार्ग द्वारा आने वाले यात्री इंदौर एयरपोर्ट से सीधे इस कॉरिडोर के जरिए बेहद कम समय में उज्जैन बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंच सकेंगे।

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मुआवजे का नया मॉडल: देश में पहली बार किसानों को मिली रिकॉर्ड राशि

इस विशाल सड़क परियोजना के निर्माण के लिए इंदौर और उज्जैन संभाग के कुल 917 किसानों की लगभग 242.939 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। राज्य सरकार ने भूमि के बदले प्रभावित किसानों को 816 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि का वितरण किया है।

नया कीर्तिमान: इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह रही कि मध्य प्रदेश में पहली बार पारंपरिक कलेक्टर गाइडलाइन को दरकिनार कर, वर्तमान बाजार मूल्य और हालिया रजिस्ट्री दरों को आधार बनाया गया। इसके तहत जमीन मालिकों को वास्तविक मूल्यांकन से 4 से 8 गुना तक ज्यादा मुआवजा दिया गया है, जो राज्य के इतिहास में एक नया उदाहरण है।

28 गांवों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

इस चमचमाते ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण से दोनों जिलों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी गति मिलने की उम्मीद है।

  • सीधा जुड़ाव: परियोजना के तहत इंदौर जिले के 20 गांव और उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे इस मुख्य मार्ग से लिंक हो जाएंगे।

  • व्यापक प्रभाव: इसके अलावा, इस कॉरिडोर के आसपास स्थित 40 से 50 अन्य गांवों की करीब 15 लाख की आबादी को सुगम परिवहन और व्यापार के नए अवसर मिलेंगे।

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