रजत पालकी में विराजित मां उमा को श्रद्धालुओं ने निहारा

राजसी अंदाज में महारानी निकली भ्रमण पर
उज्जैन। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर महाकाल चौराहा, गुदरी बाजार, हरसिद्धि पाल से लेकर रामघाट तक मां उमा के जयकारे गूंज उठे। राजसी ठाट-बाट से महारानी भ्रमण पर निकली। रजत पालकी में मां को निहारने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु सवारी मार्ग पर हाथ जोड़े खड़े थे। रामघाट पर जवारे विसर्जन के बाद सवारी फिर से महाकाल मंदिर परिसर पहुंची।
दरअसल, मौका था सात दिवसीय उमा-सांझी महोत्सव के समापन का। सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों की पूर्णता के बाद सोमवार को सवारी का दिन था। मां उमा को पूजन पाठ कर रजत पालकी में बैठाया गया। कहारों ने मां के जयकारे लगाए और पालकी सभा मंडप से बाहर निकली। पालकी को कंधे पर उठाने की लोगों में होड़ रही।
मुख्य द्वार पर सलामी: पालकी जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंची सशस्त्र बल की टुकड़ी ने मां को सलामी दी। फिर यहां से आगे का सफर शुरू हुआ। डोल रथ पर गरुड पर विराजीं मां उमा और महेश के साथ काफिला महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी, तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, नईसड़क, कंठाल चौराहा, सराफा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनीबाजार, गुदरी चौराहा, बक्षीबाजार, कार्तिक चौक एवं मोढ़ की धर्मशाला से रामानुज कोट होते हुए रामघाट पहुंचा।
जवारे व संजा विसर्जित
रामघाट पर जवारे एवं संजा का विसर्जन किया गया। यहां से पालकी ने वापसी शुरू की। कहारवाड़ी, बक्षीबाजार, महाकाल रोड होते हुए पालकी फिर से मंदिर पहुंची।
20 को निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी
20 अक्टूबर को बाबा महाकाल की सवारी निकलेगी। यह सवारी नए शहर में आएगी। शाम ४ बजे सवारी शुरू होगी और दशहरा मैदान आएगी। साल में एक बार बाबा महाकाल फ्रीगंज में आते हैं। फिर कार्तिक-अगहन मास में सवारी निकलेंगी।









