नगरपूजा : शराबबंदी की वजह से बोतल की जगह क्वार्टर से लगा भोग

कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने की पूजा
उज्जैन। शारदीय नवरात्र में हर साल होने वाली नगरपूजा में इस बार बोतल की जगह क्वार्टर से मां को मदिरा का भोग लगाया गया। सीएम के शहर में होने से कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने भी ताबड़तोड़ पूजा निपटाई।
नगरपूजा की हलचल चौबीस खंबा माता मंदिर में रविवार शाम से ही शुरू हो गई थी। यहां प्रसादी और भोग के लिए सामान पहुंचा दिया गया था। इस बार माता को अर्पित करने के लिए मदिरा की बोतल के बजाय क्वार्टर भेजे गए थे। सोमवार को अफसरों ने पहले मां का विधिवत पूजन किया। उन्होंने महालया और महामाया को हार अर्पित किए, फिर मंदिर परिसर में ही तैयार किए भोग समर्पित किए। फिर क्वार्टर से मदिरा अर्पित की। पूजन की प्रक्रिया जल्दी से निपटाई गई, क्योंकि सीएम डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक बैठक होनी थी। पूजन के बाद रेवन्यू विभाग की टीम का सफर शुरू हुआ।
27 किलोमीटर चलेंगे पैदल 40 से ज्यादा मंदिरों तक जाएंगे
रेवेन्यू विभाग के कर्मचारी और चौकीदार नगरपूजा के लिए निकले। दिनभर में वे करीब ४० मंदिरों तक जाएंगे और नगरपूजा करेंगे। इस दौरान हांडी से मदिरा की धारा सतत गिरती रहेगी। शाम को पूजा का समापन गढ़कालिका क्षेत्र स्थित हांडीफोड़ भैरव पर होगा।
उमंग-उत्साह से भरे नवरात्र-8
संतोषी माता : यहां आकर पूरी होती है हर तरह की मनोकामना
देश के ५१ शक्तिपीठों मे से एक हरसिद्धि माता मंदिर के पीछे संतोषी माता का मंदिर है। कहा जाता है कि यहां दर्शन करने वाले की हर इच्छा पूरी होती है। शारदीय और चैत्रीय दोनों नवरात्र में मंदिर में उत्सवी माहौल रहता है। मां का शृंगार चांदी के मुघौटे से किया जाता है। पूरे नौ दिन तक मां इसी स्वरूप में रहती है। इस दौरान उनका स्पर्श नहीं किया जाता। हालांकि पूरी नवरात्रि में शृंगार बदलता रहता है। हर दिन यह अलग होता है।
नवरात्र मे क्या खास-नवरात्रि के पहले दिन ही मंदिर में अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है। यह पूरे नौ दिन तक जलती है। माना जाता है कि अखंड ज्योति के दर्शन करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और मनोकामना पूरी होती है। पुजारी गोलू पंडित बताते हैं कि पहले दिन घटस्थापना की जाती है। फिर जवारे बोए जाते हैं। यह नौ दिन तक प्रतिमा के समक्ष रहते हैं। इस दौरान विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
यह भी खास- मंदिर में प्रतिपदा से नवमी तक प्रसाद वितरण होता है। खासियत यह रहती है कि पूरे नौ दिन तक इसमें अलग-अलग खाद्य सामग्री दी जाती है।









