इंदौरगेट एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए इलेक्ट्रिक पोल हटना शुरू

एक हिस्सा 3.42 और दूसरा हिस्सा 1.9 कि.मी. लंबा होगा
इंदौर गेट से निकास चौराहा तक बनेगा टू लेन कॉरिडोर
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मकोडिय़ा आम- हरिफाटक ओवरब्रिज के बाद पीडब्ल्यूडी की सिंहस्थ विंग ने अब इंदौरगेट- निकास चौराहा एलिवेटेड कॉरिडोर का काम भी शुरू कर दिया है। कॉरिडोर निर्माण का भूमिपूजन 19 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। 18 महीने में दोनो कॉरिडोर को पूरा करने लक्ष्य रख गया है। कॉरिडोर का एक हिस्सा मकोडिय़ा आम से हरिफाटक ब्रिज, नीलगंगा तक रहेगा, जबकि दूसरा से इंदौर गेट से निकास चौराहे तक। एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण होने से महाकाल मंदिर से मंगलनाथ और काल भैरव मंदिर की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। इंदौरगेट- निकास चौराहा एलिवेटेड कॉरिडोर में अभी पोल शिफ्टिंग का काम चल रहा है।
व्यापारियों ने बताया ब्रिज के लिए सड़क के सेंटर में कील गाड़कर दोनों तरफ निशान डाल दिए हैं। पोल शिफ्टिंग का काम चल रहा है। इंजीनियर प्रफुल्ल जैन ने बताया आगर रोड- चिमनगंज मंडी- हरिफाटक ब्रिज कॉरिडोर 4 लेन रहेगा, जबकि इंदौर गेट- निकास चौराहा 2 लेन मार्ग है।
दोनों सड़क पर फिलहाल भारी यातायात
यह दोनों ही मार्ग पर भारी यातायात दबाव वाले हैं। एक पर व्यवसायिक क्षेत्र है तो दूसरे पर बस स्टैंड- रेलवे स्टेशन।
सिंहस्थ के दौरान जब श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी तो यह एलिवेटेड कॉरिडोर ट्रैफिक का दबाव कम करने में बहुत सहायक होंगे।
एंट्री और एक्जिट यहां से
जैन ने बताया एलिवेटेड कॉरीडोर के प्रवेश के लिए चिमनगंज मंडी से प्रवेश रैंप तथा फ्रीगंज देवास गेट बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन जाने के लिए चामुंडा माता मंदिर चौराहे पर निकास रेंप रहेगा। महाकाल मंदिर की ओर जाने के लिए इंदौर गेट तिराहे से गदा पुलिया की ओर निकास रैंप दिया जाएगा।
प्रीकास्ट टेक्नोलॉजी से कर रहे हैं काम
जैन ने बताया काम तेजी से करने के लिए प्रीकास्ट टेक्नोलॉजी से काम कर रहे हैं। एलिवेटेड कॉरिडोर का साइट पर काम चलेगा। हालांकि स्पॉन और अन्य हिस्से दूसरी जगह बनेंगे और यहां लाकर पिलर पर टिका दिए जाएंगे। चरक हॉस्पिटल के पास प्लांट भी बन रहा है।
एक हिस्सा 1900 मीटर तो दूसरा हिस्सा 3420 मीटर का होगा
जैन ने बताया भू-अर्जन सहित एलिवेटेड कॉरिडोर की लागत 945.20 करोड़ है।
मकोडिय़ा आम चौराहे से इंदौर गेट तक की लंबाई 3420 मीटर है जबकि दूसरे हिस्से का एलिवेटेड कॉरीडोर 1900 मीटर का रहेगा।
क्या है ब्रिज और एलिवेटेड कॉरिडोर में अंतर: ब्रिज किसी नदी या घाटी जैसी प्राकृतिक बाधा को पार करने के लिए बनाए जाते हैं, जबकि एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्य रूप से शहरी ट्रैफिक और भीड़भाड़ से निपटने के लिए सड़कों के ऊपर तैयार किए जाते हैं। एलिवेटेड कॉरिडोर काफी लंबा और एक समग्र प्रणाली की तरह होता है, जबकि ब्रिज छोटा या बड़ा दोनों हो सकता है जिसका मुख्य काम दो अलग किनारों को जोडऩा होता है।









