उज्जैनवासी पी गए 365 करोड़ का नर्मदा पानी

डेम के पानी को अब पेयजल के लिए सुरक्षित करना जरूरी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाकाल नगरी उज्जैन में वैसे तो शिप्रा नदी है और पेयजल के लिए 2250 एमसीएफटी क्षमता का गंभीर डेम भी, लेकिन इस बार हालात अलग है। गंभीर डेम सूखने की कगार पर है, जिसे अब नर्मदा के पानी से भरा जा रहा। रोचक पहलू यह कि अब तक महाकाल नगरी 365 करोड़ से ज्यादा का पानी पी गई है।
नर्मदा के पानी से उज्जैन के लोगों की पयास लंबे समय से बुझाई जा रही है। अब स्थिति यह है कि नर्मदा के पानी का बिल बढ़कर 365 करोड़ 54 लाख 20 हजार 570 रुपए हो गया है। ये आंकड़ा अगस्त तक का है। सितंबर और अक्टूबर दो माह का बिल अभी आना बाकी है। हालांकि ये भारी भरकम बिल आज का नहीं बल्कि पिछले तीन चार वर्षों का है। पर इससे यह साफ हो रहा कि पानी कितना कीमती है और इसे बचाना उससे ज्यादा जरूरी, लेकिन स्थिति एकदम उलट है।
गंभीर डेम में अब केवल 614 एमसीएफटी पानी ही बचा है और उसे पेयजल के लिए बचाने की जरूरत है लेकिन वर्तमान में किसान भी इससे सिंचाई कर रहे और अन्य उपयोग में भी लिया जा रहा। जिससे नर्मदा का पानी लेने के बाद भी डेम का जलस्तर कम हो रहा है। गंभीर डेम के आंकड़े खुद इसकी स्थिति बता रहे। 16 अक्टूबर को डेम में 627 एमसीएफटी पानी था और शुक्रवार 23 अक्टूबर को इसमें 614 एमसीएफटी पानी ही बचा है। यानी पिछले आठ दिनों के अंतराल में 15 एमसीएफटी पानी कम हो गया। इस स्थिति को देखते हुए डेम के पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित घोषित करना आवश्यक है। हालांकि पीएचई ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन को इसका आदेश जारी करना बाकी है। मामले में ईई राहुल सूर्यवंशी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
ऐसे कम हो रहा पानी
| दिनांक | शेष पानी (एमसीएफटी) |
|---|---|
| 16 अक्टूबर | 627.452 |
| 23 अक्टूबर | 614.439 |
| 24 अक्टूबर | 612.580 |
| कुल क्षमता | 2250 एमसीएफटी |









