रक्षाबंधन के पहले शकर 55 रुपए किलो

महंगाई की मार : त्योहारी दौर में आम जनता की मुसीबत बढ़ी
उज्जैन। रक्षा बंधन और दीपावली का त्यौहार मिठाइयों की मिठास के बिना संभव नहीं है। इस दौरान हर घर में मिठाई का उपयोग जरूर होता है। इस कारण दोनों त्यौहारों के पहले शकर के भाव भी उछाल खाते हैं। लेकिन इस बार तो महंगाई ने सारी हदें पार कर दी। अभी से ही शकर के दाम 55 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। जबकि रक्षाबंधन आने में अभी तकरीबन 25 दिन हैं। भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के त्योहार पर इस बार आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पडऩे वाला है। त्योहारी सीजन में शकर के दाम में भारी उछाल आया है और यह 55 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। एक महीने पहले तक जो शकर 45 रुपए किलो बिक रही थी, उसके दाम बढऩे से त्योहारी मिठास फीकी पड़ती नजर आ रही है।
पहली बार राखी पर इतनी महंगी हुई शकर
यह पहला मौका है जब मिठाई और त्योहारी सीजन के दौरान शकर के दाम इतने अधिक स्तर पर पहुंच गए हैं। चूंकि शक्कर हर घर की जरूरत है, इसलिए इसकी खपत सबसे ज्यादा होती है। त्योहारी मांग को देखते हुए सरकार ने रक्षाबंधन के लिए शकर का कोटा 50,000 टन बढ़ाकर 23.5 लाख टन जरूर किया है, लेकिन कारोबारियों के अनुसार यह मांग के मुकाबले बेहद कम है। यही वजह है कि बाजार में कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।
थोक बाजार का हाल और स्टॉक सीमा का पेच
कुछ दिन पहले थोक बाजार में शकर 4870 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही थी। शनिवार देर शाम तक भाव बढ़कर 5050 से 5100 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। व्यापारियों के मुताबिक, बाजार में 4000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की गई है, जिसे कारोबारी व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं।
15 अगस्त के आसपास और तेजी संभावित
उज्जैन शहर में सामान्य दिनों में रोजाना शकर की खपत करीब चार गाडिय़ां (ट्रक) है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार के पास कोटा बढ़ाने की जो मांग रखी गई थी, उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोटा कम होने के कारण बाजार में सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है। आम लोगों को अब बाजार में 55 रुपए किलो तक शकर खरीदनी पड़ रही है। स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि 15 अगस्त के आसपास कोटा सीमित रहने के कारण कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी आ सकती है।









