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भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल बनाने वाली कंपनी उज्जैन में बनाएगी ओवरब्रिज

हरिफाटक ओवरब्रिज को सिक्सलेन बनाने के लिए दिल्ली से आई टीम, कर रही सर्वे

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महाकाल मंदिर के नीलकंठ प्रवेश द्वार तक होगा ब्रिज चौड़ा

सुधीर नागर|उज्जैन। इंदौर से उज्जैन तक बन रहे सिक्स लेन को महाकाल मंदिर के नीलकंठ द्वार तक बनाने के लिए हरिफाटक ओवरब्रिज को भी सिक्सलेन करने की तैयारी शुरू हो गई है। खास बात यह कि भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल बनाने वाली दिल्ली की कंपनी इसकी पूरी योजना तैयार कर मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) को सौंपेगी। टीम ने सर्वे का काम शुरू कर दिया है।

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सिंहस्थ 2028 के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट को सरकार ने जमीन पर उतारने का काम तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने संभागीय समिति की बैठक में सिक्स लेन को नीलकंठ द्वार तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह काम एमपीआरडीसी को सौंपा गया है। इसके तहत हरिफाटक ओवरब्रिज का चौड़ीकरण भी किया जाएगा।

एमपीआरडीसी ने दिल्ली की लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) कंपनी को सर्वे और डीपीआर बनाने का काम दिया है। एलएंडटी ने मुंबई और नवी मुंबई को जोडऩे के लिए समुद्र पर भारत का सबसे लंबा पुल बनाया है जो दुनिया का 12वां सबसे लंबा पुल है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर 20 किमी लंबा पुल भी इसी कंपनी ने बनाया है।

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देश में किसी नदी पर बना यह सबसे लंबा पुल है। यही कंपनी अब उज्जैन में हरिफाटक ओवरब्रिज चौड़ीकरण के लिए योजना तैयार कर रही है। टीम ने उज्जैन में डेरा डाल दिया है और जल्द ही सर्वे कर वह योजना बनाएगी। एमपीआरडीसी अधिकारियों ने एलएंडटी कंपनी के आने की पुष्टि की है।

पुल की लंबाई बढऩे की संभावना

एलएंडटी कंपनी ने सर्वे का काम शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार इस कंपनी के आने से पुल की लंबाई बढऩे की संभावना है। सरकार इस योजना पर काम कर रही है कि हरिफाटक ब्रिज को महामृत्युंजय द्वार से सीधे जोड़ दिया जाए। इससे इंदौर से आने वाले वाहन सीधे महाकाल मंदिर के नंदी हॉल तक पहुंच सकेंगे। इसे फ्लाई ओवर बनाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही है, जिससे ब्रिज की शुरुआत में जंक्शन के कारण आ रही समस्याएं दूर हो सकें। एलएंडटी कंपनी लंबे पुल बनाने में एक्सपर्ट है, जिससे यह ब्रिज भी सिंहस्थ से पहले सुविधाजनक बन सकेगा।

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