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जैन समाज का अष्टाह्निका महापर्व शुरू, नमकमंडी सहित अन्य जिनालय में हुआ सिद्ध चक्र मंडल विधान

इंद्र-इंद्राणी बनकर समाजजन ने पूजन किया ,29 तक आयोजन, 30 को हवन-पूजन से समापन

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। चातुर्मास से पहले दिगंबर जैन समाज में होने वाला सबसे बड़ा अष्टाह्निका महापर्व मंगलवार से शुरू हो गया। इस मौके पर कलश यात्रा निकली और जिनालयों में सिद्धचक्र मंडल विधान हुआ। इस बार तिथि बढऩे से अष्टाह्निका महापर्व 9 दिन यानी 29 जुलाई तक रहेगा। 30 जुलाई को हवन-पूजन होगा।
मंगलवार को उत्सव की सबसे ज्यादा हलचल पुराने शहर के नमकमंडी इलाके में देखी गई। यहां के चंदाप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में

महोत्सव शुरू करने से पहले कलश यात्रा निकली। जिनेंद्र जैन के यहां से महिलाएं कलश लेकर निकलीं और धन्यकुमारी जैन के घर पहुंचीं। यहां पंडित खुमानसिंह जैन को कलश सौंपा गया। यहां से फिर से साधक मंदिर पहुंचे और आठ दिवसीय सिद्ध चक्र मंडल विधान शुरू हुआ। प्रथम कलश की बोली संजय जैन टोंग्या परिवार के नाम रही। उन्होंने पत्नी और पुत्र-पुत्रवधू के साथ हिस्सा लिया। पंकज जैन चना वाला ने बताया कि नमकमंडी स्थित चंदा प्रभु जिनालय में आदिनाथ महिला मंडल और भक्तांबर महिला मंडल द्वारा आठ दिवसीय सिद्ध चक्रमंडल विधान हो रहा है।

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महिला मंडल की अध्यक्ष ज्योति जिनेंद्र जैन और सचिव सरोज राजेंद्र जैन ने बताया कि ब्रह्मचारी मनोरमा छाबड़ा और विधानाचार्य खुमानसिंह जैन के मार्गदर्शन में रोजाना विधान की पूजन होगी। मंगलवार को सुबह अभिषेक और शांतिधारा हुई। आचार्य निमंत्रण, घट यात्रा, मंडप शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा और मंगल कलश स्थापना के बाद भक्तांबर महिला मंडल ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद विधान पूजन शुरू हुआ। इसमें समाजजन इंद्र-इंद्राणी बनकर पूजन में शामिल हुए। पूजन महोत्सव २९ जुलाई तक चलेगा। ३० जुलाई को हवन-पूजन होगा। सुबह से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम शाम तक चलने की उम्मीद है। महोत्सव के दौरान अन्य धार्मिक आयोजन भी होंगे।

रोजाना होंगे जिनेंद्र भक्ति के कार्यक्रम
रोजाना रात को जिनेंद्र भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। सोमवार को भगवान नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर समाजजनों ने जिनेंद्र पूजन कर निर्वाण लाडू चढ़ाए थे।

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शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक-शांतिधारा, ध्वजारोहण

उज्जैन। अष्टाह्निका महोत्सव के तहत दिगंबर जैन समाज के 16 मंदिरों में मंगलवार सुबह से विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। लक्ष्मीनगर स्थित शांतिनाथ जैन मंदिर में मुनि प्रणीतसागरजी विराजित के सानिध्य में सुबह 7 बजे भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ। सोधर्म इंद्र जितेंद्र रानू जैन थे और विधान क्रिया सिद्धार्थजी ने पूर्ण कराई।

इस अवसर पर महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा के बाद ध्वजारोहण हुआ। ध्वजारोहण के बाद धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रणीतसागरजी ने कहा प्रतिष्ठा के ग्रंथों में ध्वजारोहण के बारे में बताया है कि पूर्व दिशा में ध्वज फहराने से समृद्धि आती है और क्लेश दूर होते हैं। शांतिनाथ मंदिर में अष्टानिका पर्व के तहत मंदिर में दोपहर 3 बजे से 1008 लौंग से मंत्र आराधना की जाएगी। यह जानकारी चातुर्मास समिति संयोजक मनोज जैन और महिला मंडल अध्यक्ष ममता जैन ने दी।

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