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अनाज-तिलहन व्यवसायी संघ की बैठक आगे बढ़ी, 20 को चुनाव पर बात

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। संभाग की प्रमुख मंडियों मे से एक चिमनगंज कृषि उपज मंडी की प्रतिष्ठित संस्था अनाज-तिलहन व्यवसायी संघ के चुनाव पर चर्चा अब 20 जुलाई को होगी। गुरुवार को संघ के सदस्य चुनाव की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए साथ बैठे लेकिन ऑडिट रिपोर्ट नहीं आने से विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। .

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दो साल पहले सितंबर 24 में अना-तिलहन व्यवसायी संघ के चुनाव हुए थे। जितेंद्र अग्रवाल इसके अध्यक्ष चुने गए थे। मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। इसके साथ ही चुनाव की हलचल भी शुरू होने वाली है। गुरुवार को अनाज-तिलहन व्यवसायी संघ की कार्यकारिणी की बैठक गणेश मंदिर स्थित कार्यालय में शाम 5 बजे शुरू हुई । 23 सदस्यीय कार्यकारिणी के सदस्यों के बीच चुनाव और हिसाब-किताब को लेकर सदस्यों के बीच चर्चा हुई। चूंकि अभी ऑडिट पूरा नहीं हुआ है, ऐसे में हिसाब-किताब पर कोई बात नहीं बन सकी। सदस्यों ने तय किया कि 20 जुलाई (सोमवार) तक के लिए बैठक स्थगित कर दी, तब तक ऑडिट रिपोर्ट भी आ जाएगी। तब एक बार फिर बैठकर कर साधारण सभा और चुनाव की तैयारियों पर चर्चा कर ली जाएगी।

बता दें कि संभाग की सभी 42 मंडियों में उज्जैन का यह व्यापारी संघ 550 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी संस्था माना जाता है। संस्था के पास करोड़ों की संपत्ति के साथ-साथ प्रसिद्ध रिद्धि-सिद्धि गणेश मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी भी है।

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बैठक में कुछ ने खोला मोर्चा, कई साधे रहे मौन

सूत्रों के अनुसार, बैठक की शुरुआत से ही संघ के आय-व्यय के हिसाब-किताब को लेकर स्थिति गरमा गई। बैठक में पूर्व अध्यक्ष निमेष अग्रवाल, डायरेक्टर संतोष गर्ग, कोषाध्यक्ष अशोक तल्लेरा और संघ सचिव हजारीलाल मालवीय सहित करीब 15 कार्यकारिणी सदस्यों ने भाग लिया। पूरी बैठक के दौरान कुछ गिने-चुने सदस्य ही चर्चा और आय-व्यय पर सवाल-जवाब करते नजर आए, जबकि शेष अधिकांश सदस्यों ने अपनी बात रखने की बजाय मौन रहना ही बेहतर समझा।

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इस संबंध में अनाज तिलहन व्यापारी संघ अध्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि संघ के खर्च का ऑडिट हो रहा है। अमूमन ऑडिट रिपोर्ट जुलाई अंत तक आती है। दो साल की ऑडिट रिपोर्ट कार्यकारिणी के सामने रखी जाएगी और इसके बाद नई कार्यकारिणी के गठन और साधारण सभा की तैयारी पर चर्चा की जाएगी। अग्रवाल के मुताबिक चुनाव लेट नहीं हैं। वह समय पर ही हैं। इस बार भी सितंबर तक चुनाव हो सकते हैं।

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