सिया गोयल भी बच निकलेगी? पुलिस सबूतों के लिए परेशान

केतन अग्रवाल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए किसी उलझी हुई मर्डर मिस्ट्री से कम नहीं साबित हो रहा है। अपनी ही मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी द्वारा रची गई यह खौफनाक साजिश अब एक बेहद अहम मोड़ पर आ गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुख्ता सबूत जुटाने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। सिया गोयल पर कौन सी कानूनी धाराएं लगाई जाएं, इसे लेकर भी जांच अधिकारी बड़ी सावधानी बरत रहे हैं, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी इस पूरे केस को ‘सोनम रघुवंशी’ वाले मामले की तरह पलट सकती है।

पुलिस जांच में यह साफ हो चुका है कि सिया और चेतन ने मिलकर ही केतन को रास्ते से हटाने का फूलप्रूफ प्लान बनाया था, लेकिन अब जांच अधिकारियों को एक बड़ा डर सता रहा है कि कहीं इस केस में भी मेघालय के चर्चित ‘सोनम रघुवंशी’ मर्डर केस जैसा कोई कानूनी ट्विस्ट न आ जाए।
‘सोनम रघुवंशी केस’ से क्यों डरी है पुलिस?
हाल ही में मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर’ केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत से जमानत मिल गई, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। सोनम को बेल मिलने की सबसे बड़ी वजह पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया (BNS के तहत) में हुई तकनीकी खामियां और लूपहोल्स थे। पुलिस ने सोनम को गिरफ्तार करते समय दस्तावेजों में मर्डर की धारा 103(1) के बजाय धोखाधड़ी की धारा 403(1) दर्ज कर दी थी, जो कि एक बड़ी कानूनी चूक थी।
फुलप्रूफ चार्जशीट की तैयारी: पुणे पुलिस इसी तकनीकी और कानूनी गलती से खौफजदा है। महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, सिया और चेतन के खिलाफ एक ऐसी “फुलप्रूफ” चार्जशीट तैयार की जा रही है, जिससे अदालत में बचाव पक्ष के वकीलों को कोई फायदा न मिल सके।
सबूतों का टोटा: परिस्थितियों पर टिकी है पूरी मर्डर मिस्ट्री
इस मर्डर को अदालत में साबित करना पुलिस के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है, क्योंकि पूरी कहानी चश्मदीदों के बजाय सिर्फ और सिर्फ परिस्थितिजन्य सबूतों (Circumstantial Evidence) पर टिकी है। पुलिस के सामने ये 3 बड़ी चुनौतियां हैं:
- कोई चश्मदीद गवाह नहीं: घटना के वक्त लोहगढ़ किले की चट्टान से केतन को धक्का देते हुए देखने वाला कोई भी गवाह वहां मौजूद नहीं था।
- सीसीटीवी में हत्या कैद नहीं: किले के पास लगे कैमरों में सह-आरोपी चेतन चौधरी सिर्फ एक हुडी पहने हुए नजर आ रहा है, जो सीधे तौर पर मर्डर को साबित करने के लिए नाकाफी है।
- डमी रीक्रिएशन की सीमा: पुलिस ने एक डमी पुतले का इस्तेमाल करके क्राइम सीन को रीक्रिएट जरूर किया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि डमी के गिरने का तरीका, वजन और एंगल वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं कर सकता कि केतन को धक्का दिया गया था या वह खुद गलती से फिसला था।
लाई डिटेक्टर टेस्ट और डिजिटल सबूतों पर टिकी उम्मीदें
भारतीय कानून के तहत पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट के नतीजों को सीधे तौर पर अदालत में ठोस सबूत नहीं माना जाता। इसके बावजूद पुलिस सिया गोयल का यह टेस्ट कराने पर पूरा जोर दे रही है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इस टेस्ट के दौरान सिया अनजाने में कुछ ऐसे राज उगल सकती है जिससे पुलिस को डिजिटल लीड मिल जाए।
उदाहरण के लिए, यदि सिया यह कबूल करती है कि उसने मर्डर से पहले लोहगढ़ किले की ऊंचाई के बारे में इंटरनेट पर सर्च किया था, तो पुलिस उसकी डिजिटल सर्च हिस्ट्री को फॉरेंसिकली रिकवर कर सकती है। इस तरह के स्वतंत्र डिजिटल सबूत अदालत में पूरी तरह से मान्य होंगे।
कड़ियों से कड़ियां जोड़ती जांच: 2004 कॉल्स, कैफे मीटिंग और फटा पासपोर्ट
इस ब्लाइंड मर्डर केस की हालिया जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों की पूरी टाइमलाइन और साजिश को बेनकाब किया है:
| घटना/साजिश | जांच में सामने आए मुख्य तथ्य |
|---|---|
| कॉल डिटेल्स (CDR) | सिया और चेतन के बीच पिछले 6 महीनों में 238 घंटे बात हुई और कुल 2004 कॉल्स किए गए। |
| हत्या वाले दिन की मीटिंग | 18 जून (हत्या के दिन) को किले पर जाने से ठीक पहले दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां मौत का आखिरी ताना-बाना बुना गया। |
| बाली ट्रिप और फटा पासपोर्ट | इससे पहले 6 जून को केतन और सिया प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए बाली जाने वाले थे, लेकिन सिया ने चालाकी से केतन का पासपोर्ट निकालकर वॉशरूम में फेंक दिया ताकि ट्रिप कैंसिल हो जाए। |
इन तमाम अजीब घटनाओं और सिया की जिंदगी में चेतन के बार-बार दखल देने से केतन को शक होने लगा था। अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही केतन ने अपने पिता से पूछा था कि क्या उन्होंने शादी तय करने से पहले सिया का सही तरीके से बैकग्राउंड चेक किया था?
फिलहाल अदालत ने सिया और चेतन की पुलिस रिमांड बढ़ा दी है। पुलिस सूत्रों का साफ मानना है कि यह पूरा केस कड़ियों को आपस में जोड़ने पर टिका है। अगर बचाव पक्ष अदालत में एक भी कड़ी को तोड़ने में कामयाब रहा, तो पूरा केस ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है। यही वजह है कि अब पुलिस का पूरा फोकस डिजिटल ट्रेल, मोबाइल डेटा और हत्या के मकसद (Motive) को साबित करने वाले अकाट्य सबूतों को जुटाने पर है।









