उज्जैन-इंदौर के बीच 48 किमी का सफर महज 35 मिनट में पूरा होगा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर से

सिंहस्थ के लिए मील का पत्थर साबित होगा, संभागायुक्त ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर शासन और प्रशासन ने कमर कस ली है। सोमवार को संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने चंद्रावतीगंज पहुँचकर निर्माणाधीन इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर इस ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को सिंहस्थ 2028 से काफी पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नया मार्ग वर्तमान उज्जैन-इंदौर रोड पर बढ़ते दबाव को कम करेगा और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक वैकल्पिक और सुगम मार्ग प्रदान करेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए।
निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त श्री सिंह ने एमपीआरडीसी के अधिकारियों से निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि काम की गति बढ़ाने के लिए साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप यह कॉरिडोर सिंहस्थ महापर्व में श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे समय पर पूरा करना हमारी प्राथमिकता है।
क्यों खास है यह कॉरिडोर ?
दूरी और समय की बचत- 48.10 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन हाईवे के बनने से इंदौर और उज्जैन के बीच का सफर मात्र 30 से 35 मिनट का रह जाएगा।
नॉन -एक्सेस कंट्रोल: किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे एलिवेटेड के बजाय जमीनी स्तर पर बनाने का निर्णय लिया है। यह एक नॉन-एक्सेस कंट्रोल सड़क होगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को कहीं से भी एंट्री-एग्जिट की सुविधा मिलेगी।
भूमि अधिग्रहण: परियोजना के लिए इंदौर और उज्जैन के लगभग 28 गांवों की 175 हेक्टेयर से अधिक निजी भूमि अधिग्रहित की जा रही है।
कनेक्टिविटी को मजबूती: इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।









