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गंगा दशहरा के एक दिन पहले 25 से शुरू होगा नौतपा, 2 जून तक चलेगा तपन चक्र

सूर्य करेंगे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश गर्मी भी अपने चरम पर रहेगी

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रुद्र संवत्सर में दिखेगा गंगा का रौद्र रूप, मालवा में झमाझम बारिश के योग

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही 25 मई से नौतपा शुरू हो जाएगा, जो 2 जून 2026 तक चलेगा। २५ मई को ही गंगा दशहरा भी है। इन नौ दिनों तक धरती पर गर्मी का प्रभाव चरम पर रहेगा जिसे तपन चक्र कहा जाता है। वैदिक पंचांग गणनानुसार इस वर्ष नौतपा के तपन चक्र से देश सहित मालवा क्षेत्र में सुभिक्ष और संतुलित वर्षा के प्रबल योग बन रहे हैं। इस वर्ष रुद्र नाम संवत्सर है, जिसके प्रभाव से बारिश के मौसम में गंगा का रौद्र स्वरूप देखने को मिलेगा।

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श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार इस बार रोहिणी नक्षत्र का वाहन गज है। पारंपरिक ज्योतिष में गज वाहन का सीधा संबंध सुभिक्ष वर्षा से होता है। इसका अर्थ है कि इस वर्ष बिखरी हुई लेकिन खेती के लिए अत्यंत उपयोगी, संतुलित और लाभकारी बारिश होगी। साथ ही इस वर्ष आषाढ़ माह की शुरुआत बुधवार से हो रही है, जिसे कृषि के लिए हितकारी और संतुलित वर्षा का संकेत माना जाता है। वर्षा कारक ग्रहों की स्थिति के कारण ताप का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम रहने तथा बादल बनने के अनुकूल संकेत भी मिल रहे हैं।

रोहिणी तपे, मृग बरसे
ग्रामीण परंपरा और लोककथा में कहावत है कि रोहिणी तपे, मृग बरसे। मान्यता है कि नौतपा जितना अधिक तपता है यानी गर्मी प्रबल रहती है, मानसून उतना ही बेहतर होता है। यदि नौतपा के दौरान बार-बार बादल छा जाएं या बारिश हो जाए, तो लोकविश्वास में इसे वर्षा चक्र के कमजोर होने का संकेत माना जाता है।

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आधिकारिक वर्षा ऋतु 22 जून से
ज्योतिषीय दृष्टि से रोहिणी चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र है। इसमें सूर्य का प्रवेश अग्नि तत्व को बढ़ा देता है। इसके परिणामस्वरूप गर्मी, शुष्कता, लू और जल की कमी जैसी स्थिति बनती है और शरीर में पित्त की वृद्धि अधिक होती है। इसके बाद जब सूर्य लगभग 22 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, तब वर्षा ऋतु की आधिकारिक शुरुआत मानी जाएगी।

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