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चरक भवन की लिफ्ट समस्या हल होगी, 5 जून लास्ट डेट

टीएल बैठक : लापरवाही पर कलेक्टर सख्त, दो का वेतन काटा, एसडीओ वन और शिक्षा अधिकारी को शोकाज

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। आए दिन बंद रहने वाली चरक भवन की लिफ्ट को लेकर कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने कड़ा रूख अपनाया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से साफ कहा कि 5 जून आखिरी तारीख है। अगर इसके बाद लिफ्ट बंद मिली तो खैर नहीं रहेगी। चरक भवन प्रभारी के साथ सीएमएचओ पर भी कार्रवाई होगी। कर्तव्यों को पूरा नहीं करने पर उन्होंने दो अफसरों का वेतन काट दिया और दो को शोकाज जारी कर दिए।

संभाग के सबसे बड़े चरक अस्पताल में लिफ्ट की समस्या सालों से बनी हुई है। यहां की 8 लिफ्ट में से सिर्फ 3 चालू हैं, जबकि ५ बंद हैं। चालू लिफ्टों की स्थिति भी ठीक नहीं है, यह जब चाहे खराब हो जाती है और मरीज व उनके परिजन बीच में फंस जाते हैं। शुक्रवार को ही चरक भवन के मुआयने पर गए जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट और स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अशोक वर्णवाल ने सभी लिफ्ट शुरू करने के निर्देश दिए थे। बावजूद सोमवार तक यह शुरू नहीं हुई थीं। सात मंजिलें भवन की ऊपरी मंजिलों पर जाने में लोगों को काफी दिक्कत हो रही है, ऐसे में कलेक्टर को कड़ा रूख अपनाना पड़ा।

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तराना-बडऩगर के अफसरों पर गाज

टीएल बैठक में दायित्वों की ढिलाई पर भी कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने तराना जनपद सीईओ और बडऩगर नगरपालिका सीएमओ का एक-एक सप्ताह का वेतन काटने के निर्देश दिए।

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बैठक में इन अफसरों पर कार्रवाई

पीएम विश्वकर्मा योजना में लापरवाही पर सीईओ जनपद तराना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना में सुस्ती पर बडऩगर नपा सीएमओ पर वेतन काटने की कार्रवाई।

विभागीय योजनाओं में लापरवाही पर महिदपुर के पशुपालन अधिकारी, साइकिल वितरण में देरी पर शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी और पदीय दायित्वों में लापरवाही पर एसडीओ वन को कारण बताओ नोटिस।

शासकीय योजनाओं के लापरवाही पर लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को कड़ी चेतावनी और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखने के निर्देश।

नई पहल : टीएल बैठक में अच्छे कामों का प्रजेंटेशन होगा
अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए कलेक्टर ने अनूठी पहल की है। अब प्रत्येक टीएल बैठक में बेहतर कार्य करने वाले विभाग का काम भी प्रोजेक्टर पर दिखाया जाएगा। सोमवार को जनपद उज्जैन, महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर पालिका नागदा केे कार्यों का प्रेजेंटेशन दिया गया।

जारी रहेगी निजी अस्पतालों की जांच
जिले में निजी अस्पतालों की जांच आगे भी जारी रहेगी। जो भी अस्पताल, क्लीनिक अपंजीकृत या नियमविरुद्ध मिले तो उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने टीएल बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए चिकित्सा संस्थानों की जांच का क्रम लगातार जारी रखने के निर्देश दिए।

आधे से अधिक क्लीनिक/ अस्पताल फर्जी मिले
10 मई से जिले में अस्पताल और क्लीनिकों का चैकिंग अभियान शुरू किया गया है। 16 मई तक 119 स्वास्थ्य संस्थानों की जांच में 74 बगैर वैध पंजीयन के चलते मिले। अवैध में 39 शहरी और 35 ग्रामीण क्षेत्र के हैं। इस मामले में ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति चिंतनीय है। यहां के 51 में सिर्फ 16 संस्थान वैध मिले।

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