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शिप्रा में पर्यटकों के लिए चल रहे स्पीड बोट, पर सुरक्षा के इंतजाम कमजोर!

जबलपुर के बरगी डेम में हुए हादसे के बाद भी सबक नहीं, पुराने हो चुके लाइफ जैकेट किसी को देते हैं किसी को नहीं

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जबलपुर के बरगी डेम में 30 अप्रैल को पर्यटकों से भरा क्रूज नर्मदा नदी में डूब गया था जिससे कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इतने बड़े हादसे के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। रामघाट पर चलने वाले क्रूज और स्पीड बोट में सुरक्षा का ध्यान अमूमन नहीं रखा जाता है। यहां स्पीड बोट में घूमने वालों पर्यटकों में से किसी को लाइफ जैकेट दिया जाता है तो किसी को नहीं। कई श्रद्धालु ऐसे भी होते हैं जो जैकेट पहनने से इंकार भी कर देते हैं। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी है कि लाइफ जैकेट सभी को पहनाए जाएं जिसकी किसी भी आपात स्थिति में बचा जा सके।

दरअसल, भगवान महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आने वाले और स्थानीय श्रद्धालु रामघाट पर नदी की सैर कर सकें, इसके लिए 22 साल पहले उज्जैन पर्यटन विकास परिषद द्वारा शिप्रा नदी में स्पीड बोट चलाने की शुरुआत की थी। राणोजी की छत्री के सामने इसका संचालन मां शिप्रा बोट क्लब द्वारा किया जाता है। वर्तमान में एक 18 सीटर बड़ी नाव और एक 8 सीटर स्पीड बोट चलाई जाती है जिसमें बैठकर प्रतिदिन 100 से 150 पर्यटक नदी की सैर करते हैं। सुबह 8 से रात 10 बजे तक इसका संचालन किया जाता है जिसके लिए प्रति व्यक्ति 40 हैं। स्पीड बोट पुराने हो चुके हैं, लाइफ जैकेट तो हैं लेकिन किसी को दिए जाते हैं तो किसी को नहीं। पुराने होने से इनकी स्थिति भी दयनीय है और रंग भी फीका पड़ गया है। इससे पहनने के बाद जान बच जाए, इस संबंध में भी कुछ कहा नहीं जा सकता।

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तीन शिफ्ट में तैनात रहते हैं 30 जवान
होमगार्ड और एसडीईआरएफ के कुल 30 जवान रामघाट पर सुरक्षा में तैनात रहते हैं। सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 2 से रात 10 बजे तक और रात 10 से सुबह 7 बजे तक की तीन शिफ्ट (प्रत्येक शिफ्ट में 10 जवान) में यह तैनात रहते हैं। यहां चलने वाली बड़ी नाव में सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा जाता है। बोट क्लब संचालक बड़ी नाव में बैठने वालों में से कई को लाइफ जैकेट ही नहीं पहनाते, जबकि राणोजी की छत्री के सामने करीब 8 फीट पानी, जबकि कहीं गड्ढे होने के कारण 10 फीट भी है।
– ईश्वरलाल चौधरी, चौकी प्रभारी, रामघाट

सुरक्षा के सभी इंतजाम

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क्रूज और स्पीड बोट में सुरक्षा के सभी इंतजाम हैं। समय-समय पर इनका मेंटेनेंस होता है। लाइफ जैकेट भी पर्याप्त हैं जो सभी को पहनाए जाते हैं, इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाती। शुरुआत से ही लाइफ जैकेट दे रहे हैं। 18 सीटर बड़ी नाव और 8 सीटर स्पीड बोट में प्रतिदिन100 से 150 टूरिस्ट नदी की सैर करते हैं। 22 सालों से इसका संचालन कर रहे हैं लेकिन अभी तक किसी तरह का हादसा नहीं हुआ।
– सुनील कुमार गुप्ता, संचालक, मां शिप्रा बोट क्लब

ऐसा होना चाहिए लाइफ जैकेट
लाइफ जैकेट की सबसे बड़ी पहचान यह है कि असली लाइफ जैकेट पानी में जाने पर व्यक्ति को सीधा (चेहरे को ऊपर) रखती है और उसमें लेग स्ट्रैप (जांघों के बीच से गुजरने वाली पट्टी) होती है। बिना स्ट्रैप के जैकेट पानी में ऊपर खिसक जाती है जिससे डूबने का खतरा रहता है।

लेग स्ट्रैप- असली लाइफ जैकेट में नीचे पैरों के बीच से गुजरने वाली पट्टियां होती हैं। अगर यह बंधी नहीं होगी तो पानी में जाते ही जैकेट शरीर से निकलकर ऊपर तैरने लगेगी और व्यक्ति पानी में डूब सकता है।

मजबूत लॉक्स- एक अच्छी जैकेट में सामने की तरफ मोटे और मजबूत प्लास्टिक के बकल (लॉक्स) होने चाहिए जिन्हें कसकर बांधा जा सके।

हाई-विजिबिलिटी कलर- असली लाइफ जैकेट हमेशा चटख (गाढ़े) नारंगी (ऑरेंज) या पीले (यलो) रंग की होती है ताकि दूर से ही पानी में व्यक्ति नजर आ सके

सिटीजन/आईएसआई मार्क- जैकेट के अंदर एक सरकारी या अंतर्राष्ट्रीय मानक (जैसे आईएस, एसओएलएएस या सीई) का टैब लगा होना चाहिए जो उसकी वजन उठाने की क्षमता बताता हो।

सीपीआई या सीटी क्षमता- इसमें हमेशा पर्याप्त फ्लोटेशन फोम भरा होना चाहिए जो व्यक्ति के वजन के हिसाब से उसे पानी की सतह पर रखे।

 सीटी (विसिल) और रिफ्लेक्टिव टेप- लाइफ जैकेट्स में हमेशा एक सीटी जुड़ी होती है और कंधों पर चमकदार रिफ्लेक्टिव टेप लगे होते हैं ताकि अंधेरे में मदद मांगी जा सके।
(जानकारी शहर के जाने-माने स्वीमिंग कोच हरीश शुक्ला के मुताबिक )

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