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अंगारकी चतुर्थी: चिंतामण, मंगलनाथ और अंगारेश्वर मंदिर में आस्था का सैलाब

अंगारेश्वर में शाम को होगा विशेष शृंगार, रात तक चलेगा दर्शन का सिलसिला, मंगलनाथ और अंगारेश्वर में सुबह से ही भीड़

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी आज (मंगलवार) मनाई जा रही है। चतुर्थी का संयोग होने के कारण इसे अंगारकी चतुर्थी भी कहते हैं। इसके चलते सुबह से ही चिंतामण गणेश सहित श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री अंगारेश्वर महादेव में श्रद्धालुओं के रूप में आस्था का सैलाब उमड़ा। दर्शन का यह सिलसिला देर शाम तक चलेगा। इस दौरान मंगल दोष के निवारण के लिए कई श्रद्धालुओं ने श्री मंगलनाथ और अंगारेश्वर महादेव मंदिर में भात पूजा भी करवाई।

धर्मशास्त्रों के अनुसार यह दिन भगवान श्रीगणेश और चौथ माता के साथ-साथ महामंगल व पृथ्वी माता की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन व्रत करने से कई गुना फल मिलता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है उनके लिए भी यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है। ज्योतिषियों के मुताबिक ज्येष्ठ मास को वर्ष के 12 महीनों में सबसे बड़ा माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ अधिकमास होने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है।

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भातपूजन के लिए उमड़े भक्त

उज्जैन को मंगल ग्रह की जन्म स्थली माना जाता है। यहां स्थित श्री मंगलनाथ और श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में मंगल ग्रह की विशेष उपस्थिति मानी गई है। इस दिन भगवान का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक एवं पूजन किया गया। इस दौरान मंगल दोष को दूर करने के लिए श्रद्धालुओं ने भात पूजन करवाया। मंगलनाथ मंदिर के प्रशासक केके पाठक ने बताया कि आम दिनों में मंदिर में ४०० से ५०० भात पूजन होता है लेकिन आज के विशेष दिन इसका अनुमान नहीं लगाया जा सका। इसी तरह श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. मनीष उपाध्याय ने बताया कि आम दिनों में ५० से १०० के बीच भात पूजन प्रतिदिन होता है लेकिन आज यह आंकड़ा करीब ४०० तक पहुंचने की उम्मीद है। शाम को भगवान अंगारेश्वर का आकर्षक गुलाल शृंगार किया जाएगा।

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मंगल देव को प्रसन्न करने का दिन
जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष है या मंगल की स्थिति प्रतिकूल है, उनके लिए यह दिन विशेष है। इस दिन ऋण मोचक मंगल स्तोत्र या अंगारक स्तोत्र का पाठ करने से आर्थिक प्रगति, नौकरी और व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। अंगारकी चतुर्थी पर चंद्रोदय रात 10.28 बजे होगा। सौभाग्यवती स्त्रियां दिनभर व्रत रखकर शाम को भगवान गणेश और चौथ माता का विधि-विधान से पूजन करेंगी। कथा सुनने के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर व्रत का पारणा किया जाएगा।

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