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महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव…

ई-कार्ट में वीआईपी और बुजुर्ग असहाय कर रहे पैदल सफर

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अक्षरविश्व लाइव : लोगों को नहीं बैठाने के तमाम बहाने बनाते रहे ड्राइवर

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति में ई-कार्ट में सवारी कराने के लिए दर्शनार्थियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। ई-कार्ट अब सिर्फ वीआईपी को ही सेवाएं दे रही हैं। आम श्रद्धालु बेरिकेड्स की बागड़ में फंसकर पैदल चलने को मजबूर हैं। इनमें बुजुर्ग भी शामिल हैं।

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प्रबंध समिति ने मंदिर पहुंचने वाले आम दर्शनार्थियों के वाहन करीब एक किमी दूर ही प्रतिबंधित कर दिए हैं। वाहनों को नीलकंठ द्वार, त्रिवेणी संग्रहालय द्वार या फिर हरसिद्धि मंदिर चौराहे तक ही एंट्री मिलती है। आगे का रास्ता उन्हें पैदल ही तय करना होता है। नीलकंठ और त्रिवेणी द्वार से बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे, नि:शक्त दर्शनार्थियों को मानसरोवर या शंख द्वार तक लाने-ले जाने के लिए ई-कार्ट सेवा देने वादा किया था। इसके लिए स्वयंसेवी संगठनों, कारपोरेट संस्थानों ने मंदिर समिति को ई-कार्ट भी भेंट भी की थी। समिति के पास करीब 40 से अधिक ई-कार्ट हैं, लेकिन आम दर्शनार्थी को यह सेवा नहीं मिल रही है। सारी ई-कार्ट वीआईपी सेवा में लगी हैं।

सवाल करने पर ड्राइवर-गार्ड करते हैं अभद्रता: बुजुर्ग व पैदल चलने में असहाय कई दर्शनार्थी ड्राइवर से गाड़ी में बैठाने का निवेदन करते हैं तो ड्राइवर वीआईपी ड्यूटी का बोलकर साफ इंकार कर देते हैं। कुछ तो अभद्र व्यवहार करते हैं। -हमारी नौकरी मत खाओ, अधिकारियों ने गाड़ी वीआईपी ड्यूटी के लिए लगाई है। सुरक्षा गार्ड भी अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं

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गाड़ी खड़ी कर चले गए ड्राइवर

रविवार शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच नीलकंठ द्वार पर आम दर्शनार्थी परेशान होते रहे। ई-कार्ट वीआईपी सेवा में लगी थी। यहां पर ई-कार्ट खड़ी कर ड्राइवर यह कहकर चले जाते हैं कि वाइन की बैटरी डिस्चार्ज हो गई, जैसे ही वीआईपी पाइंट आता है ये सारे ड्राइवर गाड़ी लेकर गेट पर तैनात हो जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसे हालात यहां आम हैं।

अधिकारी और पुलिस की ड्यूटी में भी तैनात रहती है गाड़ी

मंदिर समिति के पास करीब 48 ई-कार्ट हैं। इनमें से आमतौर पर करीब 10 वाहन खराब रहते हैं। तकरीबन 20 गाडिय़ां रोटेशन में चार्जिंग पर रहती हैं। करीब 25 गाडिय़ां एक शिफ्ट में चलती हैं, जिनमें से चार गाडिय़ां पुलिस विभाग को सेवाएं देती हैं और ३ मंदिर समिति अधिकारियों की सेवा में फुल टाइम तैनात होती हैं। बाकी नेता नगरी और वीआईपी की सेवा मेें हैं।

वीआईपी का रास्ता साफ बाकी बैरिकेड्स में आओ

जैसा की तस्वीर से साफ है, वीआईपी सेवा में लगी ई-कार्ट के लिए प्रबंध समिति ने रास्ता क्लीयर कर दिया है। दर्शनार्थियों के लिए बैरिकेड्स लगा दिए हैं, ताकि कोई बीच रास्ते में भी वाहन में बैठने की हिमाकत न कर सके। दर्शनार्थियों के लिए बना रोड गाड़ी के लिए रिजर्व कर दिया और दर्शनार्थी बेरिकेड्स में एक-दूसरे को धकियाते चल रहे हैं।

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