अधिकमास के कारण 3 माह तक लगेंगी महाकाल को गलंतियां

उज्जैन। भगवान श्री महाकाल को शीतलता प्रदान करने के लिए परंपरानुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से 11 मटकियों की गलंतियों से जल प्रवाह किया जाएगा। 3 अप्रैल से शुरू होने वाला यह क्रम इस बार अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) होने के कारण लगभग तीन माह तक निरंतर चलेगा। यह व्यवस्था ज्येष्ठ पूर्णिमा यानी 29 जून तक रहेगी।

परंपरा के अनुसार, गर्भगृह में भगवान महाकाल के लिंग पर गलंतिका (मिट्टी के पात्र) के माध्यम से जल की बूंदें निरंतर अर्पित की जाएंगी। इसके लिए 11 मिट्टी के कलश स्थापित किए जाएंगे, जिनमें गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, सरयू, क्षिप्रा और गण्डकी जैसी पवित्र नदियों का आव्हान कर जल भरा जाएगा। मंत्रोच्चार के साथ इन कलशों से रिसने वाला जल भीषण गर्मी में भगवान को ठंडक प्रदान करेगा। रजत अभिषेक पात्र के साथ इन कलशों को बांधकर गलंतिका की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।









