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अमित शाह की रणनीति से बंगाल का किला फतह

नईदिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक दशक पहले पार्टी की कमान संभालने के साथ जो बड़ा राजनीतिक चुनावी मिशन बंगाल में शुरू किया था, उसके एक बड़े अध्याय की पूर्णता है- पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक विजय। जीत के बाद अब बंगाल में सरकार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। बंगाल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि ९ मई को शपथ ग्रहण समारोह होगा।

 

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प्र धानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शाह ने अपने कार्यकाल और उसके बाद के अध्यक्षों के समय भी उसी गति से बंगाल में अभियान चलाया। इस बार के चुनाव में शाह ने बंगाल में अपनी रणनीति से हर मतदाता तक बदलाव की लहर पैदा की साथ ही डर से निकलकर बेखौफ मतदान का भरोसा भी दिलाया। पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से पूरी तरह से बाहर करने, ओडिशा में भाजपा को लाने, बिहार में भाजपा के व्यापक विस्तार के साथ अपना मुख्यमंत्री बनाने के साथ पश्चिम बंगाल ही ऐसा मिशन था, जो पूरा नहीं हो पाया था। इसके लिए पांच साल पहले व्यूह रचना की गई, लेकिन ममता बनर्जी किसी तरह अपना किला बचा ले गई थी, लेकिन इस बार शाह ने उनको कोई मौका नहीं दिया। ममता बनर्जी के अजेय माने जाने वाले किले को आखिरकार ध्वस्त कर दिया।

जैसे को तैसा रवैया अपनाकर साफ कर दिया कि अब भय नहीं चलेगा…

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चुनाव अभियान के दौरान अमित शाह लगभग ३० दिनों तक किसी न किसी रूप में बंगाल में ही रहे। इस दौरान केवल भाषण और रोड शो ही नहीं किए, संगठन को बहुस्तरीय रणनीति में इस तरह से ढाला कि भाजपा अपनी एक-एक बात मतदाता तक पहुंचाने में सफल रही। चुनाव प्रबंधन भी इस तरह से किया कि कोई भी उसे भेद कर न तो गड़बड़ी कर सका और न ही हिंसा के लिए गुंजाइश रहने दी। समय रहते ही जैसे को तैसा रवैया अपनाकर साफ कर दिया कि अब भय नहीं चलेगा। शाह देर रात तक चलने वाली बैठकों में पार्टी नेताओं के साथ रणनीति तय करते और अगले दिन उसी योजना को जमीन पर उतारने में जुट जाते थे। दिन में रैलियों और रोड शो के जरिये व्यापक माहौल बनाया। बीच-बीच में दूसरे राज्यों में भी चले जाते। वहां से लौटकर फिर देर रात बैठकें कर संगठन को धार देने में जुट जाते। उन्होंने 50 से अधिक रैली और रोड शो किए।

ये पैंतरे अपनाए

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1. अमित शाह ३० दिन पश्चिम बंगाल में रहे।

2. पांच अलग अलग जोन में रात्रि प्रवास कर रात 1-2 बजे तक संगठन की
बैठकें की।

3. सबसे ज़्यादा चुनावी कार्यक्रम… 50+ ( 30 जनसभा, 12 रोडशो, बैठकें, प्रेस कांफ्रेंस)।

4. पीएम मोदी के बाद सबसे बड़ी सभाएं।

5. एसआईआर में फर्जी वोटर एक भी न बचे, ताकि टीएमसी ‘छापा वोटÓ ना डाल पाए।

6. भाजपा का 100 प्रतिशत वोट 11 बजे तक पड़े।

7. पहले चरण के दिन खुद भाजपा के कंट्रोल रूम में रहे।

8. शाह ने गढ़ जीतने के लिए बड़े-बड़े बयान दिए जैसे- गुंडे घर से बाहर ना आए वरना उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे, 45 दिन में बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए जमीन देंगे। बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे।

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