इंदौर में आज BRICS कृषि मंत्रियों की अहम बैठक

इंदौर के मेघदूत उपवन में आयोजित ब्रिक्स देशों के उच्च स्तरीय कृषि सम्मेलन के तहत विकसित की गई “ब्रिक्स वाटिका” में शनिवार को विभिन्न सदस्य देशों से आए प्रतिनिधियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस विशेष पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संदेश दिया गया। पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधियों ने प्रकृति संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के अंतर्गत विशेष रूप से तैयार की गई ब्रिक्स वाटिका में कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
अंतरराष्ट्रीय मित्रता और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगी ब्रिक्स वाटिका
उद्यान प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि मेघदूत उपवन में विकसित की गई ब्रिक्स वाटिका केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मित्रता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास के साझा संकल्प का प्रतीक बनेगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के समय यूरेशिया गार्डन विकसित किया गया था। उसी श्रृंखला में अब ब्रिक्स देशों की सहभागिता को दर्शाने के लिए ब्रिक्स वाटिका तैयार की गई है।
‘BRICS INDIA’ थीम पर सजाया गया पूरा परिसर
मेघदूत उपवन परिसर में “BRICS INDIA” थीम पर आधारित एक आकर्षक आइलैंड विकसित किया गया है, जो सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। इसके अलावा पूरे परिसर में गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट, आकर्षक लैंडस्केपिंग और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य किए गए हैं।
सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी परिसर में लगाए गए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विविधता, साझेदारी और सहयोग का प्रतीक नजर आ रहा है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने इस विशेष उद्यान की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।
सम्मेलन का आज आखिरी दिन, कृषि मंत्रियों की होगी अहम बैठक
इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का शनिवार को पांचवां और अंतिम दिन है। इस दौरान ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सदस्य देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के उपायों पर व्यापक चर्चा होगी।
बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल होंगे। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी सहयोग, अनुसंधान, खाद्य हानि को कम करने और आधुनिक कृषि प्रणालियों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है।
किसानों की आय और टिकाऊ कृषि पर रहेगा विशेष जोर
सम्मेलन के दौरान सदस्य देश कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए साझा रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। बदलते जलवायु परिदृश्य और वैश्विक खाद्य चुनौतियों को देखते हुए कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा।
चार प्रमुख मुद्दों पर होगा मंथन
ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका को मजबूत बनाना।
कृषि व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
जलवायु परिवर्तन के अनुरूप टिकाऊ और लचीली कृषि व्यवस्था विकसित करना।
कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
ऐसा रहेगा अंतिम दिन का कार्यक्रम
| समय | कार्यक्रम |
|---|---|
| सुबह 10:00 बजे से 11:15 बजे तक | ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक |
| सुबह 11:15 बजे से 11:45 बजे तक | चाय एवं कॉफी अवकाश |
| सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक | द्विपक्षीय बैठकें |
| दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक | लंच |
| दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक | द्विपक्षीय बैठकें |
| रात्रि 7:30 बजे से आगे | समापन डिनर |
समापन पर तैयार होगा साझा दस्तावेज
सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति, सुझावों और चर्चाओं के आधार पर एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इस दस्तावेज में कृषि क्षेत्र की भविष्य की रणनीतियां, सहयोग के नए अवसर, खाद्य सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती खाद्य चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों की जरूरत को देखते हुए ब्रिक्स देशों की यह बैठक भविष्य में कृषि सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।









