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रामायण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से विवादों को निपटाने का प्रबंधन करें: जोशी

उज्जैन। किसी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रास्ते में आ रही छोटी-मोटी बाधाओं को स्वयं छोटा बनकर पृथक करें। विवादों के निपटारे का सर्वप्रथम मार्ग त्याग है। इस आशय से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवन में आत्मसात कर विवादों को निपटाने का प्रबंधन करें।

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उक्त बात डॉ. मनोज जोशी ने वाणिज्य अध्ययनशाला द्वारा आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। मुख्य अतिथि आशीष गर्ग थे। अध्यक्षता कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय ने की। अतिथियों का स्वागत डॉ. एस.के. मिश्रा, कार्यशाला संयोजक डॉ. आशीष मेहता, डॉ. कायनात तवर, डॉ. नागेश पाराशर, डॉ. टीना यादव, डॉ. अनुभा गुप्ता, डॉ. नेहा माथुर, डॉ. परिमिता सिंह, डॉ. नेहा वर्मा, डॉ. निधि चौहान ने किया।

स्वागत भाषण अध्ययनशाला के कोऑर्डिनेटर डॉ.शैलेंद्र कुमार भारल ने दिया। डॉ. रुचिका खंडेलवाल ने किया तथा आभार विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र किशोर मिश्र ने माना।

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