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9 माह में पूरा करना था काम तीन माह से ड्राइंग का इंतजार

ऑडिटोरियम का काम रुका, बाल भवन में चल रहा बिक्र वर्क

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। सनातन के इस महापर्व को भव्य एवं दिव्य बनाने के लिए शहर के साथ बाहरी क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर सहित विकास काम किए जा रहे हैं। इसी के तहत कोठी रोड स्थित विक्रम कीर्ति मंदिर का पुनर्विकास भी करीब पांच-छह माह पहले शुरू किया गया था जिसे 9 माह में पूरा करना था लेकिन लेटलतीफी का आलम यह है कि पिछले तीन माह से फाइनल ड्राइंग के इंतजार में ऑडिटोरियम का काम रुका हुआ है, जबकि बांगड़ बाल भवन में फिलहाल बिक्र वर्क चल रहा है। इस काम को करने का जिम्मा संभाल रही दिल्ली की कंपनी रिद्धि कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े कर्मचारी का कहना है पहले ड्राइंग बन चुकी थी लेकिन स्मार्ट सिटी द्वारा उसमें कुछ बदलाव किए जा रहे हैं जिसके चलते तीन माह से फाइनल ड्राइंग के इंतजार में काम रुका हुआ है।

दरअसल, 7.95करोड़ रुपए की इस परियोजना का उद्देश्य परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव ऑडिटोरियम में किया जा रहा है। सालों पुरानी जर्जर हो चुकी फाल्स सीलिंग को हटा दिया है। वहीं सीटिंग व्यवस्था और तकनीकी ढांचे में भी बदलाव किया जा रहा है।

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यहां नई आरामदायक सीटें, उन्नत ध्वनि प्रणाली, आधुनिक लाइटिंग, डिजिटल प्रोजेक्टर सिस्टम और एचवीएसी सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे और अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम भी स्थापित किए जाएंगे जिससे यह ऑडिटोरियम बड़े कार्यक्रमों के लिए भी सक्षम बन सके। परिसर में मौजूद जर्जर ओपन थियेटर को हटाकर इसके स्थान पर सुव्यवस्थित एवं आधुनिक सतह पार्किंग बनाई जाएगी जिससे कार्यक्रमों के दौरान पार्किंग की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। फिलहाल परिसर में लगे पेवर ब्लॉक्स निकाल दिए गए हैं।

बाल भवन का लुक भी बदलेगा

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विक्रम कीर्ति मंदिर परिसर स्थित बांगड़ बाल भवन का फिलहाल बिक्र वर्क किया जा रहा है। यहां दीवारों पर नए सिरे से प्लास्टर किया जाएगा। इसके आंतरिक स्वरूप को भी नया लुक मिलेगा। इसे इंटरेक्टिव सिक्का म्यूजियम में बदला जाएगा जिससे यह स्थान ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व का केंद्र बन सके। इसके साथ परिसर के बाहरी हिस्सों में सौंदर्यीकरण, फर्शबंदी और लैंडस्केपिंग का काम प्रस्तावित है। काम पूरा होने के बाद इससे ना केवल सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगी।े

इनका कहना
अभी ड्राइंग नहीं मिली है जिसके कारण काम रुका है। संभवत: इस माह यह मिल जाए। काम में तीन माह की देरी होने से निर्धारित समय सीमा में काम पूरा होना मुश्किल है।
सोनू राठौर, साइट इंजीनियर, रिद्धि कंस्ट्रक्शन कंपनी

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