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मोक्षदायिनी शिप्रा को ‘अपवित्रता’ से ‘मोक्ष’ का इंतजार

नदी को प्रदूषित होने से रोकने के प्रबंध नहीं….

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन मोक्ष प्रदान करने वाली शिप्रा को अपवित्रता से ‘मुक्ति-मोक्ष’ का इंतजार है। नदी में कान्ह का प्रदूषित पानी तो मिल रहा है। यह ओर अधिक अपवित्र और गंदा नहीं हो इसके जमीनी तौर पर कहीं भी इंतजाम नजर नहीं आ रहें है। जिम्मेदार विभाग-एजेंसिया शिप्रा का साफ रखने के लिए तमाम दावों के साथ हर साल ताकत झोंकते है,लेकिन परिणाम शून्य है।

अब देखिए..अनंत चतुदर्शी को बीते ढाई माह और नवरात्रि को संपन्न हुए तीन से अधिक महीने हो गए है,लेकिन नदी में गणेशजी और मां अम्बे की मूर्तियों के बांस-लकडिय़ों के स्ट्रक्चर तैर रहे है। ऐसे हाल चिंतामन गणेश बायपास स्थित शिप्रा पूल के है। यहां एक,दो,तीन नहीं 10-15 स्ट्रक्चर नदी में है। कई दिनों से इन्हे बाहर निकालने की किसी ने चिंता नहीं की।

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यह क्या हो रहा है…

शिप्रा प्रदूषित नहीं हो क्या इसकी जिम्मेदारी केवल प्रशासन की है…? आम नागरिक को भी अपने ‘दायित्व और कर्मÓ का एहसास होना चाहिए की नहीं…?

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गुरुवार सुबह 9.00बजे के यह दृश्य है,जिसमें कई लोग दोपहिया वाहन से आए,निर्माल्य (फूल-पत्तियां और पूजन) सामग्री का विसर्जन नदी में कर गए। अब सवाल यह कि ऐसा करने से क्या नदी का प्रदूषण नहीं बढ़ रहा है..?

मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी का कहना था…भाई साहब ऐसा तो रोज…दिनभर चलता है। नदी में किसी भी सामग्री पर अर्थदंड़ का प्रावधान है,लेकिन कोई जिम्मेदार विभाग या अधिकारी इस ओर आता ही नहीं है।

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