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तीर्थ-पर्यटन नगरी भिक्षावृत्ति मुक्त योजना में उज्जैन भी शामिल

भिखारियों को रोजगार से जोड़कर मुख्य धारा में लाएंगे

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उज्जैन। केंद्र द्वारा तीर्थ और पर्यटन नगरी को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की योजना योजना प्रारंभ की गई है। इसके लिए चिन्हित शहरों में उज्जैन को भी शामिल किया गया है। योजना में भिखारियों को रेस्क्यू कर रोजगार से जोडऩे का काम किया जाएगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने देश के पर्यटन और धार्मिक शहरों को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए जिन 30 शहरों की सूची जारी की थी, अब उनमें धरातल पर काम होना शुरु हो चुका है। पहले चरण में सरकार 100 करोड़ रुपये खर्च कर 29 शहरों में भिक्षावृत्ति में लिप्त 19 हजार 500 लोगों को मुक्त करेगी।

 

इसी योजना के अंतर्गत 19 शहरों ने पहले क्लस्टर का टार्गेट पूरा कर लिया है। शहरों को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने सरकार ने कार्य अनुभव के आधार पर देशभर की जिन संस्थाओं को चयनित किया है। ऐसी संस्थाएं क्लस्टर के रुप में टार्गेट पूरा कर रही हैं। एक क्लस्टर में छह माह के भीतर 50 भिखारियों को चिन्हित किया जाता है, वहां से उन्हें शेल्टर होम्स तक पहुंचाना तथा रुचि के अनुसार कौशल के विविध आयाम विकसित करना और अंत में रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।

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सरकार इन संस्थाओं को एक क्लस्टर पूरा करने के लिए 30 लाख रुपए की राशि किश्तों के माध्यम से दे रही है। इंदौर, अमृतसर, केवडिय़ा, सोमनाथ और शिमला सहित 19 शहरों के लिए यह राशि फरवरी तक पहुंच चुकी थी, जिससे अप्रैल माह तक वहां टार्गेट पूरा हुआ। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के समाप्त होती है सरकार उज्जैन, औंकारेश्वर एवं कटक सहित 10 शहरों में संस्थाओं तक राशि पहुंचाएगी।

सामाजिक संस्थाओं को दिया सर्वे का काम

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चिन्हित शहरों में भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों को सामान्य जीवन से जोडऩे का कार्य सरकार ने इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी के तौर पर सामाजिक संस्थाओं को दिया है, जो सर्वे के बाद भिखारियों को चिन्हित करती हैं और फिर उनका रेस्क्यू कर रोजगार से जोडऩे का काम करती हैं। संस्थाएं भिखारियों को चिन्हित कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराती हैं। 29 में से 19 शहरों ने 50 भिखारियों के क्लस्टर को भिक्षा से मुक्त कर रोजगार से जोडऩे में सफलता प्राप्त कर ली है। वहीं अन्य दस शहरों में जून माह से अभियान चलाया जाएगा।

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