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5 साल में उज्जैन में 1.5 लाख नौकरियों का दावा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अब महाकाल की नगरी सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रोजगार का नया गढ़ भी बन रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर, उज्जैन में बड़े पैमाने पर उद्योग लगाए जा रहे हैं, जिनसे अगले पांच सालों में डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं को नौकरियां मिलेंगी। इनमें 50,000 सीधे तौर पर और 1 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार शामिल हैं। सरकार ने 2025 को ‘उद्योग और रोजगार का वर्ष’ घोषित किया है। इसका मकसद सिर्फ निवेश लाना नहीं, बल्कि युवाओं को उनके घर के पास ही काम देना है। खासकर फार्मा, बायोटेक और सोलर एनर्जी जैसे सनराइज सेक्टर पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

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एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौड़ ने कहा हमारी प्राथमिकता है कि युवाओं को अपने शहर में ही रोजगार मिले। उज्जैन अब अवसरों की नगरी में बदल रहा है।

युवाओं को स्किल्ड बनाने की तैयारी
बढ़ते उद्योगों के लिए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। इसलिए, विक्रम विश्वविद्यालय अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री प्रोग्राम शुरू करेगा। इसमें छात्रों को ट्रेनिंग के बाद सीधे इंडस्ट्री में काम करने का मौका मिलेगा। उज्जैन के कॉलेजों में भी नए कोर्स शुरू किए गए हैं ताकि युवा खुद को भविष्य के लिए तैयार कर सकें।

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उज्जैन में हर सेक्टर में बढ़ रहा है निवेश

विक्रम उद्योगपुरी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में अब तक 12,500 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है, जिससे 18,000 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिला है।

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मेडिकल डिवाइस पार्क-360 एकड़ में फैले इस पार्क में 56 यूनिट्स आ रही हैं। ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, दक्षिण कोरिया और इजराइल जैसी कंपनियों के आने से 10,000 हाई-स्किल्ड नौकरियां मिलेंगी।

फार्मा और बायोटेक- सिम्बायोटिक ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एलकेएम फार्मा और कर्नाटक एंटीमाइक्रोबियल जैसी कंपनियां भी जल्द काम शुरू करेंगी, जिनसे करीब 5,000 रोजगार मिलेंगे।

ऑटोमोबाइल और सोलर- वॉल्वो-आईसर यहां ऑटो पार्ट्स बनाएगी, और जैक्सन सोलर 8,152 करोड़ रुपये का निवेश कर एक बड़ा प्लांट लगा रही है, जिससे करीब 5,000 युवाओं को नौकरी मिलेगी।

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