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भूतड़ी अमावस्या: रामघाट-52 कुंड में आस्था का स्नान

उज्जैन। बुधवार को चैत्र अमावस्या (भूतड़ी अमावस्या) के मौके पर शिप्रा में स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अलसुबह से ही श्रद्धाुलुओं को रामघाट-52 कुंड सहित अन्य घाटों पर पहुंचना शुरू हो गया था जो धीरे-धीरे बढ़ते चले गए। उन्होंने पहले शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाई और उसके बाद देव दर्शन किए। इस दौरान प्रेत बाधा से पीडि़तों को लेकर उनके परिजन पहुंचे।

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दरअसल, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए थे। घाट पर होमगार्ड, एसडीईआरएफ और मां शिप्रा तैराक दल के सदस्य मौजूद रहे। जो बार-बार श्रद्धालुओं को समझाइश देते नजर आए। इसके अलावा घाट पर चेजिंग रूम की भी व्यवस्था की गई थी ताकि कपड़े बदलने में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं आए। इस दौरान भगवान महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भी मोक्षदायिनी शिप्रा में डुबकी लगाई।

विशेष स्नान और मान्यता

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चैत्र अमावस्या को पितरों की तृप्ति और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए विशेष माना जाता है। कई श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद अपने पितरों के निमित्त तर्पण भी किया। मान्यता है कि इस दिन जो लोग ऊपरी बाधा से ग्रसित होते हैं, वे यहां आकर पवित्र स्नान करते हैं। बताया जाता है कि इसका उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है।

 

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