असावधानी से नीलगाय सतर्क, बोमा फेल

14 दिन बाद खाली हाथ लौटी वन विभाग की टीम
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जिले के बृजराजखेड़ी क्षेत्र में बोमा पद्धति से नीलगायों को पकडऩे का वन विभाग का बड़ा प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो सका। बोमा स्ट्रक्चर खड़ा करने से लेकर उसे उखाडऩे तक विभाग ने 1 जून से लेकर पूरे 14 दिन तक एड़ी-चोटी का जोर लगाया। दो दिनों तक चले मुख्य रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी विभाग बोमा के जरिए एक भी नीलगाय पकडऩे में नाकाम रहा। दावों के मुताबिक जिन 4 नीलगायों को रेस्क्यू कर गांधीसागर अभ्यारण्य छोड़ा गया है, असल में उन्हें ग्रामीणों ने खुले इलाके में दौड़ा-दौड़ाकर थकाया और फिर खुद अपने हाथों से पकड़ा था।
वन विभाग ने 1 जून से इस रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारी शुरू की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर सिर्फ 12 जून को ही रेस्क्यू हो सका। लगातार हुई हलचल के कारण नीलगायों ने ब्रजराज खेड़ी का पूरा इलाका ही छोड़ दिया। उन्हें वापस बुलाने के लिए विभाग ने 13 जून को रेस्क्यू बंद भी रखा, लेकिन चालाक नीलगाय जाल में नहीं फंसीं। रविवार सुबह भी विभाग और ग्रामीणों ने सर्चिंग की, लेकिन दूर-दूर तक कोई वन्य प्राणी नजर नहीं आया। आखिरकार, विभाग को अपना तंबू और सामान समेटना पड़ा।
टीम तय दिन पहुंच जाती तो मिलती सफलता
सूत्रों के मुताबिक विभाग ने पहले रेस्क्यू के लिए 11 जून की तारीख तय की थी। अफसरों के कहने पर गांवों में डोंडी (मुनादी) पिटवा दी गई। ग्रामीण सुबह से नीलगायों को खदेड़कर बोमा (फनल नुमा जाल) की तरफ ले आए। करीब 40-50 नीलगायों का झुंड जाल के मुहाने पर था, लेकिन विभाग की टीम वक्त पर नहीं पहुंची और नीलगाय भाग गईं। अगले दिन 12 जून को फिर से ट्रैक्टरों और बाइकों की मदद से नीलगायों को हांका गया। लगातार दो दिन तक हुए इस भारी शोर-शराबे और मानवीय दखल को भांपकर नीलगायों ने वह इलाका ही हमेशा के लिए छोड़ दिया।
हेलिकॉप्टर की कमी भी रही वजह
अफ्रीकन बोमा पद्धति में अमूमन हेलिकॉप्टर के जरिए आसमान से निगरानी रखकर वन्यजीवों को जाल की तरफ धकेला जाता है, लेकिन यहां केवल बाइक और ट्रैक्टरों के भरोसे प्रयोग किया जा रहा था। इस बड़े ऑपरेशन में उज्जैन वन विभाग के अलावा शाजापुर, राजगढ़ और पन्ना टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीमें तैनात थीं। रेस्क्यू साइट पर डॉक्टरों की टीम और वन्य प्राणियों को ले जाने के लिए दो लोडिंग वाहन भी बुलाए गए थे। इसके साथ ही क्षेत्र के लगभग 10 गांवों के ग्रामीणों ने भी इस मुहिम में पूरा सहयोग दिया लेकिन कसरत बेकार हो गई।









