वीडियो क्रिएटर ने गर्भगृह में जाकर की पूजा सोशल मीडिया पोस्ट डालने के बाद भड़के लोग

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। दिल्ली के डिजिटल क्रिएटर द्वारा श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में घुसकर दर्शन करने और उसके फोटो सोशल मीडिया पर डालने के बाद बवाल हो गया है। सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अक्षय आनंद नाम का यह वीडियो क्रिएटर वीवीआईपी के साथ आया था। उसने 15 जून को मंदिर में दर्शन किए थे। इस दिन सोमवती अमावस्या थी और महाकाल मंदिर में काफी भीड़ थी। अक्षय आनंद पारंपरिक परिधान (धोती-सोला) पहनकर गर्भगृह में पहुंचा और फोटो भी खिंचवाएं। जबकि गर्भगृह के भीतर फोटोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई। यूजर्स ने कई सवाल दागे। उज्जैन इन्फो पेज पर 190 लोगों ने कमेंट्स किए। पीयूष अग्रवाल ने लिखा जैसी गड्ढी दिखाओगे, वैसे दुम हिलाते हुए आएंगे और अंदर ले जाएंगे। प्रबोध पंडया ने लिखा दलालों की औलादें हैं। श्रीराम सूरज लिखते हैं, इनके ऊपर एफआईआर होनी चाहिए।
अलका शर्मा सवाल उठाती हैं क्यों एफआईआर होगी। आज तक जो भी पैसावाला या नेता गर्भगृह में गया, उसका कुछ हुआ क्या? क्या सारे नियम और कानून आम जनता के लिए हैं। जनता तो सिर्फ शिखर दर्शन करने के लिए है। मोहन आर्य सोनी लिखते हैं सब बिकता है खरीदने वाला चाहिए। अमन गुप्ता ने लिखा इनको गर्भगृह में ले जाने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। नहीं तो अगली बार वह दूसरों को ले जाएंगे।
संजय देवधर लिखते हैं मत अपना सिर फोड़ो, कुछ नहीं हो सकता है। उज्जैन वालों की लायकी सिर्फ शिखर दर्शन के है। आयुष राठौर ने लिखा आम जनता को तो एक घंटे लाइन में लगने के बाद भी दर्शन नहीं होते। सुनीता जोशी लिखती हैं कि दलालों ने आम जनता को बाबा महाकाल से दूर कर दिया है। योगेश रायकवार अपनी पीड़ा जताते हुए कहते हैं कि मैं तो महाकाल की फोटो में ही दर्शन कर लेता हूं। ज्यादा होता है तो शिखर दर्शन। क्योंकि अब मंदिर में पहले जैसा माहौल नहीं रहा। अर्पित अग्रवाल लिखते हैं कि बहुत जल्दी गर्भगृह में 5 लाख रुपए प्रति व्यक्ति लगने लगेंगे।
मनीष शर्मा ने लिखा भाई आजकल तो भगवान भी पैसे वालों के ही हैं। पहले भगवान फुर्सत में होते थे और जनता बिजी। अब भगवान बिजी हैं और जनता फुर्सत में है। आकाश गौर लिखते हैं कि मुझे भी बाबा को स्पर्श करना है, बताओ मंदिर वालों कितना पैसा लोगे।
विवेक माहुरकर ट्रस्ट पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। वह कहते हैं कि पूरा महाकाल मंदिर ट्रस्ट ही भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा हुआ है। राकेश शर्मा लिखते हैं गरीब के गोपाल, अमीर के महाकाल। पैसा, पद, पावर और आप नेता है तो सारे नियम आपके। अगर आप आम हैं तो आपको नियमों से गुजरना होगा।
अनुमति का अधिकार सिर्फ कलेक्टर के पास
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के नियमों को लेकर उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह में प्रवेश देने का अंतिम निर्णय कलेक्टर (जो मंदिर समिति के अध्यक्ष भी होते हैं) के पास है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अक्षय आनंद ने गर्भगृह में प्रवेश किस की अनुमति और किस अधिकार से किया है।









