सिंधिया राजपरिवार में संपत्ति विवाद, सुनवाई 27 तक टली

जयविलास पैलेस, ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिल सकती हैं दिल्ली व शिवपुरी की संपत्ति
ग्वालियर। देश के चर्चित राजघरानों में शुमार ग्वालियर के सिंधिया राजवंश मे पारिवारिक संपत्ति बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को महा-समझौता नहीं हो सका। मामले में सुनवाई फिर टल गई है। हाई कोर्ट से बुआओ के दावे का रिकॉर्ड नहीं आ पाया था। 27 जुलाई को फिर सुनवाई होगी।
केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया गया था। समझौता प्रस्ताव में सिंधिया राजघराने के मुखिया व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मप्र की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा व अन्य) के बीच अरबों-खरबों रुपए की शाही विरासतों के बंटवारे पर अंतिम सहमति बन चुकी है।
परिवार के किस सदस्य के पास क्या संपत्ति रहेगी यह भी तय होना है। इससे पहले भी 8 जुलाई को समझौता आवेदन पर सुनवाई होनी थी, लेकिन संपत्तियों का रिकॉर्ड न आ पाने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी।
इस ऐतिहासिक महा-समझौते के लागू होते ही दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो जाएगा। सूत्रों का दावा है कि आपसी सहमति में तय हुआ है कि जो पक्ष जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज (रह रहा) है, वह संपत्ति पूरी तरह उसी की हो जाएगी। इस आधार पर ग्वालियर का जयविलास पैलेस, शिवपुरी की संपत्तियां केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर आती दिख रही हैं।
कागजी उलझनें होंगी खत्म: भले ही कागजों में या पूर्व के रिकॉर्ड में उस संपत्ति का मालिकाना हक किसी भी पक्ष, ट्रस्ट या कंपनी के अधीन रहा हो, लेकिन अब वर्तमान कब्जे को ही अंतिम मालिकाना हक मानकर कोर्ट में डिक्री (डीड)
कराई जाएगी।









