महंगे होने से यूडीए के नैवेद्य लोक और प्रतिकल्पा प्रोजेक्ट को नहीं मिल रहे खरीददार, दोबारा बुलाए टेंडर

उज्जैन विकास प्राधिकरण ने दोबारा निकाली विज्ञप्ति, यूजर्स की हिम्मत नहीं-इंवेस्टर्स को रिर्टन नहीं
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रतिकल्पा और नैवेद्य लोक को ग्राहकों का इंतजार है। लांचिंग के बाद खरीददार नहीं मिलने के कारण विकास प्राधिकरण को अब इसकी दूसरी विज्ञप्ति निकालना पड़ी है। जानकार इसकी वजह प्रापर्टी जरूरत से ज्यादा महंगी होना बता रहे हैं। इनके आसपास कम कीमत में दूसरी प्रापर्टी मिल रही है। ऐसे में खरीददार यूडीए से खरीदी करने से बच रहे हैं।
यूडीए ने प्रतिकल्पा नाम से नानाखेड़ा चौराहे पर आवासीय और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया है। करीब तीन महीने पहले अप्रैल के पहले सप्ताह में यूडीए ने इसकी लांचिंग की थी। दुकानों और फ्लैट के रेट काफी महंगे हैं, जिसका कारण प्राधिकरण के जिम्मेदार लोकेशन, सुविधाएं और प्रीमियम कंस्ट्रंक्शन बताते हैं। महंगे भाव के कारण खरीदार कम आए, इस कारण प्राधिकरण को दूसरी बार इसकी विज्ञप्ति निकालना पड़ी है। इसी तरह नैवेद्य लोक की भी दूसरी बार निविदा बुलाई गई है।
प्रतिकल्पा : 47 करोड़ की लागत से बनाया, दोगुने से ज्यादा रिटर्न की प्लानिंग
करीब 1.50 लाख वर्गफीट निर्मित क्षेत्रफल वाले इस कॉम्प्लेक्स की लागत लगभग 47 करोड़ रुपए है। इसके भूतल पर 1 और प्रथम तल पर 11 बड़ी व्यावसायिक दुकानें बनाई गई है। वहीं, दूसरे से सातवें तल तक 29 थ्री-बीएचके तथा 24 टू-बीएचके फ्लैट तैयार किए गए हैं। परिसर में 68 रेसिडेंसियल फ्लैट एवं कमर्शियल प्लेस (ऑफिस व दुकान) उपलब्ध है। कॉम्प्लेक्स में छह हाई-स्पीड लिफ्ट, दो लोअर बेसमेंट में करीब 80 कारों की पार्किंग, आवासीय व्यावसायिक भाग के लिए अलग-अलग सीढिय़ां तथा पुरुष, महिला एवं दिव्यांगजनों के लिए सुविधजनक शौचालयों की सुविधा का दावा किया गया है। यूडीए ने खरीदारों को तीन वर्ष तक कोई मेंटेनेंस शुल्क नहीं लेने की घोषणा भी की है। टेंडर रेट के मुताबिक यूडीए ने यहां से १०० करोड़ से ज्यादा रिटर्न की प्लानिंग की है।
नैवेद्य लोक : 10 करोड़ के फूट जोन में छोटी-सी दुकान लाखों रुपए की
विकास प्राधिकरण की ही एक और महत्वपूर्ण योजना नैवेद्य लोक है। यूडीए ने इंदौर की 56 दुकानों की तरह उज्जैन के नानाखेड़ा में 10 करोड़ की लागत से फूड झोन नैवेद्य लोक बनाया हैै। करीब 28 हजार वर्ग फीट में विकसित नैवेद्य लोक में पहले 36 दुकानें बनना थी, लेकिन ले-आउट के कारण 34 ही बन सकीं। इसे भी अप्रैल में ही लांच किया गया था। प्राधिकरण का दावा है कि यह बेहतरीन थीम बेस्ड परिसर में शहर की पहली डेडिकेटेड ओपन मॉल की तर्ज पर भोजन, संस्कृति एवं मनोरंजन का आधुनिक केंद्र है। कल्चरल परफार्मेंस के लिये ओपन एरिया थिएटर, वाल आर्ट एवं सेल्फी पाइंट भी यहां है। यहां आकर्षक लाइटिंग के साथ साथ बैठने की बेहतर व्यवस्था का दावा यूडीए करता है। यहां की दुकानों की बिक्री के लिए भी यूडीए ने दोबारा टेंडर बुलाए हैं।
हाई रेट के कारण प्रॉपटी खरीदने की यूजर्स में हिम्मत नहीं, इन्वेस्टर्स भी पीछे हटे
प्रतिकल्पा कमर्शियल स्पेश के रेट 16 से 18 हजार रुपए और फ्लैट के रेट 8 हजार रुपए प्रति वर्ग फीट से अधिक है। उस पर भी प्राधिकरण ने टेंडर में ऑक्शन रेट मांगे हैं। यानी खरीदार को इससे अधिक रेट टेंडर में डालना है। जबकि पड़ोस में ही स्थित अन्य कॉम्प्लेक्स में तकरीबन ६ हजार रुपए के भाव में फ्लैट और 10 हजार रुपए के भाव में कमर्शियल स्पेस मिल रही है।
नैवेद्य लोक में छोटी-सी 71 स्क्वेयर फीट की दुकान का भाव 29 लाख है। बड़ी दुकानों के रेट और भी ज्यादा है।
नैवेद्य लोक में दुकान के लिए यूजर्स को दुकान की कीमत और रोटेशन मनी के रूप मेें 40 लाख का इन्वेस्टमेंट करना होगा। इतने खर्च करने के बाद यूजर्स को बैंक ब्याज, किश्त और मैंटेनेंस के लिए करीब 50 हजार रोज की कमाई करना होगी। अगर फूड बिजनेस में 30 प्रतिशत की कमाई भी मानी जाए तो रोज डेढ़ लाख रुपए का माल बेचना होगा। इतना महंगा गणित देखकर यूजर्स हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं
नैवेद्य लोक की दुकान का रेट करीब 40 हजार रुपए वर्गफीट का आ रहा है। जबकि इसके आसपास और नानाखेड़ा क्षेत्र में जमीनों के भाव अधिकतम 30 हजार रुपए वर्ग फीट है। प्रीमियम कंस्ट्रंक्शन कास्ट भी जोड़ी जाए तो यह 2200 रुपए से अधिक नहीं है। ऐसे में नानाखेड़ा क्षेत्र में 32 हजार के भाव में खुद की प्रापर्टी रेडी हो रही है जिसमें हवाई हक (छत) भी खरीदार का होगा। नैवेद्य लोक में छत का मालिक यूडीए है। ऐसे हालात मेें यूजर्स के साथ-साथ इन्वेस्टर्स भी यहां रुचि नहीं ले रहे हैं।
ओवर रेट के कारण ही पास ही स्थित श्यामाप्रसाद मुखर्जी कॉम्प्लेक्स की 12*12 साइज की दुकानें भी खाली हैं। इनके रेट यूडीए ने 35 लाख तय किए हैं।
जिम्मेदार मौन
इस बारे में उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी को कॉल और वाट्सएप मैसेज किया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।









