युवाओं के प्रति एजेंसियां संयम बरतें : सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई : भटके युवक पत्थरबाजी करते हैं, सरकार आक्रामक रवैये से बचे
नईदिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में हिंसा को लेकर एक याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि युवाओं की बात सुनना सबसे ताकतवर हथियार है। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को संयम रखना चाहिए। अगर कुछ भटके हुए युवक पत्थरबाजी भी करें, तब भी उन्हें समझाने और शांत करने की कोशिश करनी चाहिए। सरकार को भी अक्रामक रवैया अपनाने से बचना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने यह टिप्पणी रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर मनीष कुमार सोलंकी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में 20 जुलाई के ‘संसद चलोÓ मार्च के आयोजकों यानी सीजेपी प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर कुछ भटके हुए युवक पत्थरबाजी करते हैं, तब भी उन्हें समझाने और सलाह देने की जरूरत है।
जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के साथ राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस
राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली में 10 जनपथ पर जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राहुल ने कहा कि स्टूडेंट पर लाठी-पैलेट गन से हमला किया गया। राहुल अपने साथ चार प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राओं को मीडिया के सामने लाए। एक छात्रा ने कहा- भारत माता की जय बोलने पर देशद्रोही कहा गया। हम शांति से चल रहे थे तो एक पुलिस अफसर ने शरीर के ऊपरी हिस्से पर मारा। राहुल गांधी ने कहा- प्रदर्शनकारियों ने कुछ भी गलत नहीं किया। इनका लगातार शोषण हो रहा है। ये बच्चे देश के भविष्य के लिए लड़े। इन्हें माफी मांगने की जरूरत नहीं।









