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दस किमी आगे चलती थी रेकी करने वाली कार, ट्रकों में बने थे सीक्रेट बॉक्स

टीआई की हत्या के बाद खुला शराब तस्करी का सिंडिकेट, हरदा से गुजरात तक फैला नेटवर्क

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खतरा मिलते ही जंगलों में छुपा देते थे शराब की खेप, अब तक 13 आरोपी हिरासत में

अक्षरविश्व न्यूज देवास। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की हत्या के बाद पुलिस जांच में अवैध शराब तस्करी के बड़े सिंडिकेट की परतें खुलने लगी हैं। जांच में सामने आया है कि हरदा जिले के टिमरनी से शराब की खेप लोड होकर इंदौर, धार, झाबुआ और आलीराजपुर के रास्ते गुजरात तक पहुंचाई जा रही थी। इस पूरे नेटवर्क में तस्करी से लेकर रास्ते की रेकी, माल छिपाने और स्थानीय संपर्कों तक के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय थी। पुलिस अब तक 13 आरोपियों को हिरासत में ले चुकी है। डीजीपी उपेंद्र जैन के मुताबिक, नेटवर्क की पहचान कर ली गई है और पांच जिलों में पुलिस की विशेष टीमें कार्रवाई कर रही हैं।

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तस्करी के इस नेटवर्क में पुलिस से बचने के लिए बाकायदा सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया था। शराब से भरे ट्रक से करीब 10 किलोमीटर आगे चार लोगों से भरी एक कार चलती थी। यह टीम रास्ते में पुलिस चेकिंग और संभावित खतरे की जानकारी ट्रक चालक तक पहुंचाती थी। रास्ता सुरक्षित नहीं होने पर शराब की पेटियों को जंगलों में छिपा दिया जाता था। ट्रकों के कैबिन और बॉडी में विशेष कैबिन व सीक्रेट बॉक्स भी बनाए गए थे, ताकि बाहर से देखने पर वाहन सामान्य नजर आएं और शराब की खेप का पता न चल सके।

पेट्रोल पंप, बस और प्रॉपर्टी कारोबार से खड़ा किया साम्राज्य

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जांच के मुताबिक, सिंडिकेट में राहुल जायसवाल की प्रमुख भूमिका सामने आई है। वह पेट्रोल पंप, बस संचालन और प्रॉपर्टी कारोबार के साथ राजनीतिक गलियारों में भी सक्रिय था। पुलिस जांच में शराब तस्करी से अर्जित रकम के जरिए करीब 10 साल में कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने की बात सामने आई है। वहीं, इंदौर के कारोबारी मनीष पर आलीराजपुर तक शराब की खेप पहुंचाने और स्थानीय संपर्कों की जिम्मेदारी थी। बताया जा रहा है कि वर्ष 2024-25 के शराब ठेकों में लेन-देन और घाटे को लेकर हुए विवाद के बाद राहुल इस नेटवर्क में अधिक सक्रिय हुआ था।

तीन रास्तों से पहुंचाते थे खेप
जांच में सामने आया है कि हरदा जिले के टिमरनी से शराब लोड होने के बाद तस्करी के लिए तीन अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल किया जाता था। खेप इंदौर पहुंचती थी, जहां से धार, झाबुआ और आलीराजपुर के जंगलों के रास्ते गुजरात सीमा पार कराई जाती थी। नेटवर्क के मुख्य आरोपी खुद को सीधे तौर पर बचाने के लिए गरीब और जरूरतमंद स्थानीय लोगों को छोटे-छोटे कामों में इस्तेमाल करते थे।

आबकारी अधिकारी निलंबित
मामले में प्रशासन ने हरदा जिले के टिमरनी की तीनों शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर उन्हें सील कर दिया है। वहीं, लापरवाही के आरोप में हरदा के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमर सिंह बघेल और दो आबकारी आरक्षकों अरुण कुम्बरे व कृष्णपाल सिंह डोडिया को निलंबित किया गया है। डीजीपी उपेंद्र जैन के अनुसार, पुलिस की विशेष टीमें पांच जिलों में कार्रवाई कर रही हैं। सप्लायर से लेकर खरीदार तक नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है।

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