धूल की एलर्जी ने बढ़ाया खांसी का पीरियड अब ठीक होने में लग रहे महीने भर से ज्यादा

मौसम : तापमान के उतार-चढ़ाव ने खड़ी की मुसीबत,वायरल के मरीज बढ़े
चिकित्सकों की सलाह धूल और वायु प्रदुषण से बचें, गरम पानी पिएं
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। केस 1- देवास रोड के साईबाग के रहने वाले महेंद्रसिंह को सितंबर में वायरल हुआ। तेज बुखार के साथ खांसी की शिकायत रही। चिकित्सक को दिखाया। बुखार तो पांच दिन में ठीक हो गया लेकिन खांसी अब भी जारी है। हालांकि इसकी फ्रिक्वेंसी कम हुई है, पर फिर भी चाहे जब यह आ जा रही है।
केस 2 – विवेकानंद कॉलोनी में रहने वाले सैफान वारसी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अगस्त अंत में उन्हें बुखार आया, सर्दी-खांसी हुई। डॉक्टर ने वायरल बताया। बुखार तो ठीक हो गया लेकिन सर्दी-खांसी बरकरार है।
केस 3- नागेश्वरधाम की रहने वाली रेणु नागर भी सितंबर की शुरुआत में वायरल से पीडि़त हुई थीं। उनका भी बुखार तो चला गया लेकिन खासी का जोर पिछले महीने तक रहा। हालांकि अब वे ठीक है।
दरअसल, बदलते मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव, शहर में चल रहे निर्माण कार्य से उठ रही धूल की एलर्जी ने लोगों को खांसी का दर्द देना शुरू कर दिया है। हाल यह है कि पांच से सात दिन में ठीक होने वाली खांसी से निजात पाने में अब महीने-महीने भर लग रहे हैं।
चिकित्सक इसका कारण धूल की एलर्जी को मानते हैं। वे धूल से बचने और गरम पानी पीने की सलाह दे रहे हैं। वायरल के बाद परेशान कर रही खांसी को लेकर अक्षरविश्व ने शहर के जाने-माने श्वसन रोग विशेषज्ञों से बात की। उन्होंने मौसमी बदलाव के साथ शहर में हो रही डस्ट को भी खांसी पीरियड बढऩे का जिम्मेदार माना है।
लंबी खांसी से कैसे बचें
अगर एलर्जी के कारण खांसी लंबी चल रही है तो एलर्जी रोधी दवाएं दी जाती हैं। यह अतिसंवेदनशीलता कम करने में मदद करती हैं।
क्रोनिक खांसी की स्थिति में स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जाता है।
यह सावधानियां जरूरी
गरम पानी का सेवन करें। ऑयली चीजों का प्रयोग कम करें या नहीं करें। डस्ट से बचें।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कंस्ट्रक्शन साइड की डस्ट कारण
फेफड़ों मे बार-बार संक्रमण होने से शरीर की इम्युनिटी प्रभावित होती है। ऐसे मरीजों में इंटरफैरान गामा, इंटरल्यूकिन और टीएच-2 कोशिकाओं की कमी हो सकती है। बार-बार होने वाला संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करता है और कुछ राषयनिक पदार्थ निकलते हैं, जो लंबे समय तक रहने वाली खांसी का कारण बन सकते हैं। एयर पाल्युशन भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। अभी शहर में रोड चौड़ीकरण के काम चल रहे हैं। डस्ट उड़ रही है। कंस्ट्रक्शन साइड पर डीजल चलित उपकरणों का उपयोग हो रहा है।
डॉ. मुस्तफा सिंगापुरवाला, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज
एयर पाल्युशन भी वजह हो सकता है: वायरल के बाद 3 से 8 सप्ताह तक कफ (खांसी) आने के कई कारण हो सकते हैं। हवा के जरिये कोशिकाओं को डैमेज होना इसमें मुख्य है। माइल्ड बैक्टेरियल इन्फेक्शन भी दूसरा कारण हो सकता है।
डॉ. आरती जुल्का, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज
वेदर में परिवर्तन होने पर सर्दी, खांसी, वायरल, टाइफाइड जैसे केस बढ़ते हैं। ऐसे माहौल में बच्चे-बुजुर्गों को बचना चाहिए। एयर पॉल्युएशन भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है।
डॉ. जितेंद्र शर्मा, एमडी, जिला अस्पताल









