16 वर्षीय विद्यार्थी की मौत से डॉक्टर भी हैरान

बस पकडऩे के लिए दौड़ा, फिर नहीं उठ सका
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महज 16 साल की उम्र। कार्डियक अरेस्ट और चंद मिनटों में दु:खद निधन। सेंट थामस स्कूल के कक्षा दसवी के विद्यार्थी विधान कुशवाह की मृत्यु से उसके परिजन के साथ चिकित्सक भी हैरान हैं।
श्रीकृष्ण कॉलोनी में रहने वाले फूड कारोबारी संजय के बेटे विधान सोमवार की सुबह स्कूल बस पकडऩे गए थे। मां आशा (रिश्ते में ताई) उसे छोडऩे आई थीं। बस अंकपात चौराहे पर खड़ी थी और इसे पकडऩे के लिए विधान ने दौड़ लगाई और अचानक वह अंसतुलित होकर नीचे गिर गया। परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक जान जा चुकी थी।
मृत्यु से पहले देवरानी ने सौंपा था जेठानी को
दरअसल विधान की मां कविता का 15 साल पहले निधन हो गया था। अपनी मृत्यु से पहले कविता ने जेठानी आशा को विधान की परवरिश की जिम्मेदारी सौंपी थी। नि:संतान आशा ने भी विधान को अपने सगे बेटे की तरह पाला। वह उसका पूरा ख्याल रखती थीं। उन्हें क्या पता था कि विधान यूं छोड़कर चला जाएगा। विधान के इस तरह चले जाने से उसके पिता रितेश, ताऊ संजय और मां आशा हैरान हैं।
कार्डियक अरेस्ट अब उम्र नहीं देख रहा
१६ साल के विधान की मौत के लिए कार्डियक अरेस्ट को जिम्मेदार माना जा रहा है। अब से पहले तक युवा मौतों के लिए कुछ लोग कोविड वैक्सीन को जिम्मेदार बताते थे, मगर विधान उन बच्चों में शामिल हैं, जिन्हें कोविड वैक्सीन (18 से कम उम्र वालों को नहीं लगी थी)नहीं लगी थी। इस संबंध में डॉ. विजय गर्ग ने बताया कि वह दिन गए जब हार्ट संबंधी बीमारी 50 साल की उम्र में होती थी। अब तो 25 फीसदी दिल के दौरों के मामले 40 से कम उम्र वालों के हैं।
छोटी उम्र में कार्डियक अरेस्ट मतलब दिल कमजोर
छोटी उम्र में कार्डियक अरेस्ट को चिकित्सक दिल की कमजोरी मानते हैं। डॉ. गर्ग कहते हैं कि छोटी उम्र में कार्डियक अरेस्ट का कारण दिल की कमजोरी है। इसका मुख्य कारण एकाएक दिल में खून का प्रवाह रुक जाना होता है। इसकी कई वजह हो सकती है।
जन्मजात दिल की धमनियों, वॉल्व में दिक्कत हो सकती है।
हार्ट की अनियमितता, मांसपेशी की वजह से भी ऐसा हो सकता है।
यह परिवार की आनुवांशिक बीमारी भी हो सकती है। तीनों ही मामलों में चैकअप कराना बेहद जरूरी है।
फिलहाल तो जीवनशैली सबसे ज्यादा जिम्मेदार
डॉ. गर्ग कहते हैं कि हाल में कार्डियक अरेस्ट के मामले बढऩे का मुख्य कारण हमारी जीवनशैली है। लोगों ने फिजिकल एक्टिविटी कम कर दी है। उनकी डाइट हेल्थी नहीं है। लोग फ्राइड फूड का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। वह हरी सब्जियां कम खा रहे हैं। एक ही जगह पर ज्यादा समय तक बैठ रहे हैं। टेंशन ले रहे हैं।









