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मध्य प्रदेश में 16 जून से खुलेंगे सभी सरकारी स्कूल, सांदीपनि विद्यालयों के बच्चों को परेशानी का सामना

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र के लिए खुलने जा रहे हैं। इसके चलते सोमवार से शिक्षक स्कूल पहुंचने लगे हैं ताकि विद्यार्थियों के स्वागत के साथ-साथ शिक्षण व्यवस्था को सुचारु रूप से तैयार किया जा सके। स्कूलों में साफ-सफाई, पाठ्य सामग्री की तैयारी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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सांदीपनि स्कूलों में परिवहन व्यवस्था पर संकट

प्रदेश सरकार द्वारा आधुनिक शिक्षा और बेहतर सुविधाओं से लैस सांदीपनि विद्यालयों में इस बार एक बड़ी समस्या सामने आई है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए निश्शुल्क परिवहन सुविधा शुरू की गई थी, लेकिन अब बसों की कमी और संचालन संबंधी दिक्कतों के कारण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों पर पड़ रहा है, जिन्हें स्कूल पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

275 स्कूलों में 125 अब भी बस सुविधा से वंचित

प्रदेश में कुल 275 सांदीपनि विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से 150 में बस सेवा उपलब्ध है जबकि 125 स्कूल अभी भी परिवहन सुविधा से वंचित हैं। कई जगहों पर बसों की संख्या छात्रों के अनुपात में कम है, वहीं कुछ जिलों में भुगतान और संचालन विवाद के चलते सेवाएं बाधित हो गई हैं।

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बस संचालन में अनियमितता और टेंडर विवाद

सांदीपनि विद्यालयों में बस संचालन के लिए संभाग स्तर पर टेंडर जारी किए गए थे, जो समाया ट्रांसपोर्टेशन प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए थे। कंपनी पर अनुबंध शर्तों के उल्लंघन, पर्याप्त बसें उपलब्ध न कराने और ऑपरेटरों को समय पर भुगतान न करने के आरोप लगे हैं। इसी कारण ग्वालियर, जबलपुर और सागर संभाग के कई जिलों में बस सेवाएं बंद हो गई हैं।

22 जिलों में ही जारी है संचालन

वर्तमान में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के 22 जिलों में ही बस सेवा सुचारु रूप से चल रही है। सरकार इस व्यवस्था पर हर साल 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है। बढ़ते खर्च को देखते हुए शासन ने आगामी चरण में बनने वाले 200 नए सांदीपनि विद्यालयों में परिवहन सुविधा शामिल न करने का निर्णय लिया है।

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विभाग का पक्ष

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूलों की दूरी कम होने के कारण विद्यार्थियों के लिए साइकिल या अन्य साधनों से स्कूल पहुंचना संभव है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों में व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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