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अलर्ट… नहीं संभले तो बीमार कर देगा यह मौसम

सुबह सर्दी, दिन में गर्मी रात में फिर सर्दी, नवंबर में ठंड का बढऩा सेहत के लिए ठीक नहीं

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नवंबर में अमूमन इतनी ठंड नहीं पड़ती, जितनी अभी पड़ रही है। मौसम ने मेलों को भी प्रभावित किया है। सुबह का सर्द भरा मौसम सूरज के चढ़ते-चढ़ते गर्मी देने लगता है। शाम होते ही मौसम भी फिर करवट बदलता है। सूरज जाने को होता है तो ठंड चिपकने लगती है। रात ठंड के आगोश में सिमट जाती है। मौसम का यह खेल लोगों को बीमार कर रहा है। यदि सावधानी नहीं बरती गई तो यही मौसम जान का दुश्मन भी बन जाएगा।

नवंबर जैसे-जैसे विदा हो रहा है ठंडक उतनी ही बढ़ा रहा है। आमतौर पर इस महीने में गुलाबी ठंड पड़ती है। शाम को आप हाफ स्वेटर में भी तफरीह कर लेते थे, लेकिन अब इससे काम नहीं चल रहा है। मौसम के तेवर बदल गए हैं। सुबह का तापमान गिर गया है। शनिवार को ही न्यूनतम तापमान ११.०२ डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि शुक्रवार को यही तापमान ११.०८ था। शनिवार को अधिकतम तापमान २९ डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। यानी सुबह की तुलना में दोपहर में गर्मी महसूस की गई।

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मॉर्निंग वॉक पर जाने वालों की संख्या में कमी आई: शहर के विभिन्न खुले इलाकों में सबसे ज्यादा सीनियर सिटीजन मॉर्निंग वॉक के लिए निकलते हैं। कोठी रोड, उदयन मार्ग, मंगलनाथ मार्ग, रामजर्नादन मंदिर, बडऩगर रोड और शहर के बड़े बगीजों में इन्हें रोजाना देखा जा सकता है। अपनी सेहत के प्रति जागरुक से बुजुर्ग अनुलोम विलोम और अन्य योग क्रियाएं भी करते हैं। सुबह की शीत साइनस, श्वांस, स्पांडिलाइडिस और साइटिका के पीडि़तों के लिए ठीक नहीं होती है। जिन्हें साइनस की तकलीफ रहती है, उन्हें शीत बढऩे से छींके आने लगती है। डॉक्टर जीएस राठौड़ का सुझाव है कि जिन लोगों को शीत से एलर्जी है वे सुबह जल्दी घर से न निकलें। मौसम थोड़ा अनुकूल हो तब सुबह की सैर करें।

बाजार में खरीदारी भी बढ़ी

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यह मौसम का ही असर है बाजार में गर्म खाद्य पदार्थों की बिक्री में तेजी आ गई है। मिठाई की दुकानों पर करंट के लड्डू आ गए हैं। इनका भाव भी क्वालिटी के अनुसार अलग-अलग है। बाजार में सूखे मेवे से बने लड्डू और अंजीर की बर्फी का भाव ६०० से १२०० रु. प्रतिकिलो है। शाम के समय दूध जलेबी का आनंद लिया जा रहा है। जलेबी भी १५० से लेकर ५०० रुपए प्रतिकिलो के भाव से बिक रही है। सूखे मेवे जैसे, काजू, बादाम, पिस्ता, अंजीर, अखरोट, किसमिस, की खरीदारी भी बढ़ गई है।

बच्चों पर दिख रहा है ठंड का असर

बदलते मौसम का असर स्कूली बच्चों पर भी दिखाई दे रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए सुबह पांच बजे से ही तैयार होना पड़ता है। स्वेटर, ग्लब्स और मंकी कैप में बच्चे अपनी बस का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। बच्चों के लंच में भी अब बदलाव आ गया है। कोशिश यही की जा रही है कि बच्चों को गर्म चीजें दी जाएं। जैसे पिंड खजूर, सूखे मेवे लड्डू और गुड़ से बने व्यंजन। इन खाद्य पदार्थों से शरीर में गर्मी बनी रहती है।

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