उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को झटका! अब साल में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे

उज्ज्वला योजना के तहत अब साल के केवल पहले 4 गैस सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। पहले यह लाभ 9 सिलेंडरों तक दिया जाता था। सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की कीमतों में 46 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसी वजह से यह निर्णय लिया गया है।
14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 29 रुपये बढ़ने के बाद दिल्ली में 942 रुपये हो गई है। वहीं उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को यह सिलेंडर 642 रुपये में उपलब्ध हो रहा है।
लागत 1600 रुपये पार, सरकार उठा रही 700 रुपये का बोझ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत 1600 रुपये से अधिक पहुंच गई है। इसके चलते तेल कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है।
पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर रिकवरी 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि इससे पहले यह 41,338 करोड़ रुपये थी। केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है। ग्राहकों को मिलने वाली सब्सिडी इस राहत राशि से अलग है।
पेट्रोल-डीजल पर कंपनियों को हर दिन 600-700 करोड़ रुपये का नुकसान
सरकार के अनुसार तेल कंपनियां वर्तमान में डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव से एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय मानक मूल्य 46 प्रतिशत बढ़ा
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। इसकी लागत सऊदी अरब द्वारा तय किए जाने वाले मासिक मानक मूल्य पर आधारित होती है।
फरवरी में एलपीजी का यह मानक मूल्य 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून में बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। यानी संकट शुरू होने के बाद से इसमें 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान प्रोपेन 39 प्रतिशत और ब्यूटेन 52 प्रतिशत महंगी हुई है।
दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस भारत में मिल रही
सरकार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी लागत का बड़ा हिस्सा सरकार और तेल कंपनियां स्वयं वहन कर रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाला गया है।
होटल-रेस्टोरेंट के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर 3,113.50 रुपये का हुआ
होटल और व्यवसायिक उपयोग के लिए मिलने वाले 19 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई है। यह लगभग 164 रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर है, जबकि घरेलू उपभोक्ता करीब 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर रहे हैं।
होर्मुज मार्ग बंद होने के बाद भी भारत ने जारी रखी आपूर्ति
दुनिया के करीब एक तिहाई तेल और भारत के 54 प्रतिशत एलपीजी आयात का मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य है। क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत ने अपने जहाजों के माध्यम से कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति जारी रखी, जिससे देश में किसी प्रकार की कमी नहीं हुई।
घरेलू उत्पादन 60 प्रतिशत बढ़ाया, नए देशों से खरीद शुरू
आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की है। साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी गैस की खरीद शुरू की गई है।
घरेलू उपयोगकर्ताओं, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता देते हुए आपूर्ति बनाए रखी गई है। गैस चोरी रोकने के लिए ओटीपी आधारित वितरण सत्यापन को भी 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।
एलपीजी से पहले पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम भी बढ़े
पिछले कुछ सप्ताहों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं सीएनजी भी लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हुई है।
कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद पेट्रोल और डीजल अभी भी वास्तविक लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार के अनुसार वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है।
एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत कैसे तय होती है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों को आधार बनाया जाता है। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का प्रभाव पड़ता है। आयात, परिवहन, भराई संयंत्र और वितरण की लागत जोड़ी जाती है। तेल कंपनियां लागत और बाजार की स्थिति के अनुसार अंतिम कीमत तय करती हैं। सरकारी कर और सब्सिडी नीतियां भी कीमतों को प्रभावित करती हैं।
क्या होती है अंडर रिकवरी?
जब तेल कंपनियां किसी ईंधन को उसकी वास्तविक लागत से कम कीमत पर बेचती हैं, तो लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर को अंडर रिकवरी कहा जाता है। यह उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कंपनियों द्वारा वहन किया गया नुकसान होता है।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और भारत के 54 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। यही कारण है कि इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील मार्ग माना जाता है।







