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शू रैक घर के बाहर रखें या नहीं? जानें सही दिशा, स्थान और वास्तु के नियम

आजकल अधिकांश लोग अपने घर के बाहर या मुख्य दरवाजे के आसपास जूते-चप्पल रखने के लिए शू रैक का इस्तेमाल करते हैं। इसका मुख्य कारण यह होता है कि बाहर की धूल-मिट्टी और गंदगी घर के अंदर न पहुंचे। हालांकि, वास्तुशास्त्र के अनुसार शू रैक को कहीं भी रख देना उचित नहीं माना जाता। वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि घर का मुख्य प्रवेश द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का प्रवेश भी माना जाता है। इसलिए इस स्थान के आसपास रखी जाने वाली हर वस्तु का विशेष महत्व होता है।

 

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वास्तु विशेषज्ञ मान्या के अनुसार जूते-चप्पलों को राहु और केतु की ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि इन्हें घर में सही स्थान और सही दिशा में रखना जरूरी माना गया है। यदि जूते-चप्पल या शू रैक गलत दिशा में रखा जाए, तो इसका असर घर की आर्थिक स्थिति, पारिवारिक माहौल और सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य तक पर पड़ सकता है।

क्या मुख्य दरवाजे के पास शू रैक रखना चाहिए?

बहुत से लोग सुविधा के लिए मुख्य गेट के ठीक सामने या उसके आसपास शू रैक रख देते हैं। लेकिन वास्तुशास्त्र में इसे शुभ नहीं माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पल रखना या वहीं स्थायी शू रैक बनाना सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा कर सकता है।

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ऐसी मान्यता है कि घर के प्रवेश द्वार पर जूते-चप्पलों का जमावड़ा होने से धन आगमन में रुकावट आ सकती है। इसके साथ ही घर में अनावश्यक खर्च बढ़ने लगते हैं और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। कई लोगों का मानना है कि मुख्य द्वार के आसपास जूते-चप्पल रखने से परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, चिड़चिड़ापन और छोटी-छोटी बातों पर विवाद की स्थिति भी बन सकती है।

वास्तु विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यदि शू रैक गलत स्थान पर रखा गया हो तो उसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए मुख्य गेट के आसपास शू रैक रखने से पहले दिशा और स्थान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

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किस दिशा में बिल्कुल नहीं रखना चाहिए शू रैक?

वास्तुशास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को अत्यंत पवित्र माना गया है। यह दिशा देवताओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है। ऐसे में इस स्थान पर जूते-चप्पल रखना या शू रैक स्थापित करना वास्तु की दृष्टि से अशुभ माना जाता है।

मान्यता है कि उत्तर-पूर्व दिशा में शू रैक रखने से व्यक्ति के करियर, व्यापार और शिक्षा से जुड़े कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए इस दिशा को यथासंभव साफ और खाली रखना बेहतर माना जाता है।

शू रैक रखने की सही दिशा कौन-सी है?

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि जूते-चप्पल रखने के लिए सही दिशा का चयन किया जाए तो नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं।

दक्षिण-पश्चिम दिशा को शू रैक रखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दिशा में जूते-चप्पलों से जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा नियंत्रित रहती है और उसका प्रभाव घर के अन्य हिस्सों पर नहीं पड़ता। यही कारण है कि वास्तु में इसे सबसे बेहतर स्थान बताया गया है।

यदि किसी कारणवश दक्षिण-पश्चिम दिशा उपलब्ध न हो, तो पश्चिम दिशा का भी उपयोग किया जा सकता है। इस दिशा में रखा गया शू रैक अपेक्षाकृत संतुलित प्रभाव देता है और वास्तु दोष की संभावना कम रहती है।

दक्षिण दिशा भी शू रैक रखने के लिए स्वीकार्य मानी गई है। इस दिशा की दीवार के साथ जूते-चप्पलों का रैक रखा जा सकता है। वहीं, उत्तर-पश्चिम दिशा को रोजाना उपयोग में आने वाले जूतों और चप्पलों के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दिशा में रखी वस्तुओं का आवागमन बना रहता है।

शू रैक से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम

सिर्फ दिशा ही नहीं, बल्कि शू रैक का प्रकार और उसकी स्थिति भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी जाती है। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर में हमेशा बंद शू रैक का उपयोग करना चाहिए। खुले रैक में रखे जूते-चप्पल नकारात्मक ऊर्जा को आसपास फैलाने का कारण बन सकते हैं। जबकि दरवाजे वाले बंद रैक में यह प्रभाव सीमित रहता है।

इसके अलावा शू रैक को कभी भी पूजा घर, रसोईघर या बेडरूम की दीवार से सटाकर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में तनाव और आपसी मतभेद बढ़ने की आशंका मानी जाती है।

यदि घर में पुराने, फटे या टूटे हुए जूते-चप्पल रखे हुए हैं तो उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसे जूते-चप्पल घर में नकारात्मकता बढ़ा सकते हैं और शनि संबंधी दोषों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

अगर जगह की कमी के कारण मुख्य द्वार के आसपास ही शू रैक रखना पड़े, तो ध्यान रखें कि वह मुख्य चौखट से कम से कम दो फीट की दूरी पर रखा जाए। इससे मुख्य प्रवेश क्षेत्र अपेक्षाकृत साफ और ऊर्जावान बना रहता है।

यदि किसी मजबूरी में शू रैक ऐसी जगह रखना पड़ जाए जो वास्तु के अनुसार आदर्श न हो, तो एक सरल उपाय भी बताया जाता है। शू रैक के ऊपर कांच के बर्तन में समुद्री नमक रख दें। माना जाता है कि समुद्री नमक आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर अवशोषित कर लेता है और वातावरण को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार शू रैक की सही दिशा और उचित स्थान का चयन केवल सजावट का विषय नहीं है, बल्कि यह घर के वातावरण, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक संतुलन से भी जुड़ा माना जाता है। इसलिए सुविधा के साथ-साथ वास्तु नियमों का भी ध्यान रखना लाभदायक माना जाता है।

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