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जानें क्या कहती है आपके मकान की वास्तु कुंडली

जब भी आप किसी जमीन पर नया मकान बनाने जा रहे हों या किसी बने-बनाए भवन में शिफ्ट हो रहे हों, तो सबसे पहले किसी अनुभवी एक्सपर्ट से उसकी वास्तु कुंडली जरूर तैयार करवा लेनी चाहिए। इसी वास्तु चक्र के हिसाब से ही घर के भीतर स्टडी रूम, पूजा घर, बेडरूम, किचन, लिविंग एरिया और टॉयलेट जैसी जरूरी जगहों का सटीक स्थान तय होना चाहिए। नियमों के मुताबिक, किसी भी जमीन या इमारत की वास्तु कुंडली में जो उत्तर-पूर्व का कोना होता है, जिसे हम ईशान कोण भी कहते हैं, वहां देवताओं के गुरु बृहस्पति का वास माना जाता है। इसके साथ ही, घर के पूर्व वाले हिस्से पर साक्षात सूर्य देव का नियंत्रण होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति उत्तर-पूर्व या पूर्व के इस पवित्र क्षेत्र में इनके विरोधी ग्रहों (जैसे शनि या शुक्र) से जुड़ा कोई काम करता है या वैसी चीजें रखता है, तो वहां की नेचुरल और पॉजिटिव एनर्जी पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है। इस टकराव से घर के उस कोने में एक अजीब सा तनाव पैदा होता है, जिसका सीधा और बुरा असर वहां रहने वाले लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दिखने लगता है।

 

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2. सही दिशाओं का ज्ञान बदल सकता है आपकी किस्मत

अगर आपको अपने घर की वास्तु कुंडली का एकदम सही और सटीक ज्ञान हो, तो आप बहुत ही आसानी से अपने प्लॉट या मकान के किसी भी हिस्से में टॉयलेट, पूजा स्थल या एंटरटेनमेंट रूम को उसकी सही और सकारात्मक जगह पर सेट कर सकते हैं। इसके लिए किसी बड़े फेरबदल की जरूरत नहीं पड़ती। वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, घर के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) और पश्चिम दिशा वाले हिस्से पर मुख्य रूप से राहु और शनि जैसे ग्रहों का अधिकार होता है। यही वजह है कि इन दिशाओं को हमेशा भारी-भरकम रखने की सलाह दी जाती है। इन जगहों पर भारी सामान, अलमारियां या निर्माण कार्य करवाने से घर का संतुलन हमेशा बेहतर बना रहता है और नकारात्मक शक्तियां हावी नहीं हो पातीं।

3. बच्चों को बिगड़ने से बचाएगा मुखिया का सही बेडरूम

परिवार के सबसे मुख्य सदस्य या घर के मुखिया को हमेशा वास्तु कुंडली के नियमों का पालन करते हुए दक्षिण-पश्चिम कोने (नैऋत्य कोण) में ही अपना मास्टर बेडरूम बनाना चाहिए। ऐसा करने से राहु जैसी तामसिक और नकारात्मक ऊर्जाएं हमेशा शांत और दबी रहती हैं, जिसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि घर के बच्चे गलत रास्ते पर नहीं जाते और संस्कारी बने रहते हैं। देश के अलग-अलग इलाकों में कई मकानों के प्रैक्टिकल वास्तु निरीक्षण और स्टडी से यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि जब भी घर का मुखिया इस नियम के खिलाफ जाकर किसी दूसरी दिशा में सोता है, तो धीरे-धीरे बच्चों पर से उसका कंट्रोल और प्रभाव कम होने लगता है, जिससे लाडले बच्चे अपनी मनमर्जी करने लगते हैं और उनके बिगड़ने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

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4. शादी में आ रही अड़चनों को दूर करने का अचूक उपाय

अगर आपके घर में कोई मांगलिक कार्य बार-बार रुक रहा है या किसी काम को बहुत जल्दी और बिना किसी रुकावट के पूरा करना है, तो वास्तु कुंडली के अनुसार उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) के प्रभावी ग्रहों की एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है। जिन घरों में शादी की उम्र पार कर रहे युवक या युवतियों के विवाह में लगातार कोई न कोई बाधा आ रही हो, उनके लिए यह उपाय बेहद कारगर है। ऐसे मामलों में सबसे पहले उनकी जन्मकुंडली के आधार पर सही रत्न या उपाय करवाने चाहिए, और उसके तुरंत बाद उन्हें घर की वास्तु कुंडली के हिसाब से उत्तर-पश्चिम दिशा वाले कमरे में रहने के लिए शिफ्ट कर देना चाहिए। जब किसी व्यक्ति के जीवन में उसकी जन्मकुंडली, घर की वास्तुकुंडली और ईश्वर की कृपा, ये तीनों चीजें एक साथ मिलती हैं, तो बड़े से बड़ा रुका हुआ काम भी शत-प्रतिशत गारंटी के साथ समय पर पूरा हो जाता है।

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