महोत्सव : कंठाल नहीं आएगी खाती समाज की रथयात्रा

रोड चौड़ीकरण के कारण गोपाल मंदिर होते हुए छोटे मार्ग पर निकलेगी यात्रा
इस्कॉन मंदिर : विक्रमादित्य पीठ में बन रहा है अस्थाई मंदिर
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी। शहर में यात्रा के दो प्रमुख आयोजन होते हैं। पहला खाती समाज का और दूसरा इस्कॉन मंदिर का। खाती समाज करीब डेढ़ सौ बरसों से कार्तिक चौक क्षेत्र स्थित जगदीश मंदिर से रथ यात्रा निकालता है और इस बार यहां चौड़ीकरण का काम चल रहा है।ऐसे में समाजन ने यात्रा मार्ग इस बार छोटा कर दिया है। १६ जुलाई को रथ यात्रा जगदीश मंदिर से प्रारंभ होगी, कार्तिक चौक, शिप्रा किनारे से ढाबा रोड होते हुए गोपाल मंदिर की ओर टर्न हो जाएगी। यहां से 24 खंभा माता (बांकडिय़ा बड़) होते हुए कार्तिक चौक मार्ग से मंदिर पहुंचेगी। हर बार यात्रा ढाबा रोड से मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल चौराहा, सती गेट , छत्री चौक गोपाल मंदिर वाले रुट से निकलती है। इस बार सड़क चौड़ीकरण के चलते यात्रा का रुट बदला गया है। यात्रा ढाबा रोड से टर्न होकर गोपाल मंदिर जाएगी।
इस्कॉन मंदिर भी 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा इंदिरा नगर चौराहे से निकालेगा। मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि रहेंगे। पीआरओ राघव दास जी ने बताया श्री जगन्नाथ रथयात्रा 16 जुलाई की दोपहर 1.30 बजे इंदिरा नगर चौराहे से शुरू होगी। दोपहर 2 बजे श्रद्धालु रथ खींचना आरंभ करेंगे। इस वर्ष भगवान बलभद्र, सुभद्रा महारानी और जगन्नाथ स्वामी तीन अलग-अलग रथों में विराजेंगे।
सबसे आगे भगवान बलभद्र, उनके पीछे सुभद्रा महारानी और सबसे अंत में जगन्नाथ स्वामी का रथ रहेगा। यात्रा नगर निगम मुख्य कार्यालय के सामने , कोयला फाटक, चामुंडा चौराहा, फ्रीगंज ओवर ब्रिज, टावर चौक, तीन बत्ती चौराहा और देवास रोड होते हुए शाम 6.30 बजे महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ पहुंचेगी। भगवान सात दिनों तक महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ स्थित अस्थायी गुंडीचा मंदिर में निवास करेंगे। इसके लिए यहां मंदिर तैयार किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन आरती, छप्पन भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। कथावाचक कृष्णकिशोर जगन्नाथ कथा सुनाएंगे। 20 जुलाई को श्वेता गूंजन जोशी की भजन संध्या होगी। 24 जुलाई की शाम वापसी रथ यात्रा महानंदा नगर बिरला चौराहा होते हुए इस्कॉन मंदिर पहुंचेगी। 16 जुलाई की संध्या इस्कॉन मंदिर में लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं का भंडारा भी रखा गया है। ।
वैष्णव हवेलियों में रथ यात्रा उत्सव 15 को
पुष्टिमार्गीय वैष्णव हवेलियों में रथयात्रा उत्सव 15 जुलाई को मनेगा। परंपरा अनुसार ठाकुरजी का नगर भ्रमण नहीं होगा। ठाकुरजी को हवेली के भीतर ही रथ पर विराजमान किया जाएगा और दर्शन कराए जाएंगे। इस दिन एक ही दिन में तीन से चार बार विशेष दर्शन की व्यवस्था रहेगी। उज्जैन में श्रद्धालु वैष्णव हवेलियों के साथ अंकपात मार्ग स्थित वल्लभाचार्य की 73वीं बैठक में भी दर्शन कर सकेंगे। यह परंपरा नाथद्वारा में करीब 500 वर्ष पहले शुरू हुई थी। मान्यता है कि विक्रम संवत 1587 में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को महाप्रभु वल्लभाचार्य ने पहली बार रथयात्रा के दर्शन कराए थे। नाथद्वारा में श्रीनाथजी की हवेली में राजभोग के समय ठाकुरजी के सम्मुख चांदी का रथ रखा जाता है।









