शकर की मिठास पर महंगाई का झटका, तेल के भाव भी बढ़े

जनवरी में बढ़े थे भाव, अब जुलाई में पांच से सात प्रतिशत तक कीमत फिर बढ़ गई, ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण बादाम और पिस्ता भी महंगे
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। ईरान-अमेरिका के बीच चल रही जंग ने शकर की मिठास फीकी कर दी है। खाद्य तेल, बादाम, पिस्ता भी झटके दे रहे हैं। जनवरी में खाद्य तेल और किराना सामान के भाव में इजाफा हुआ था, जुलाई में यह फिर बढ़ गए हैं। ऐसे में आम आदमी की जेब पर वजन बढ़ रहा है।
हालांकि इस बार शकर के भाव में ज्यादा तेजी आई है। जनवरी में शकर की कीमत 4150 रुपए क्विंटल थी, अब यह 4550 रुपए क्विंटल हो गई है। जानकारी के अनुसार खाद्य तेल, कास्मेटिक्स, ड्राय फ्रूट के भाव में भी तेजी आई है। व्यवसायियों के अनुसार मिल मालिकों को गन्ने का कोटा कम मिल रहा है। इस कारण शकर के भाव बढ़े हैं। इधर वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी और युद्ध के कारण क्रूड आयल की कीमत में उतार-चढ़ाव का असर महंगाई के रूप में दिख रहा है। ईंधन की कीमत में वृद्धि से भाड़ा बढ़ा है और दाम ऊपर हो चले हैं।
शकर के थोक व्यापारी तथा दौलतगंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन अध्यक्ष अजय रोहरा ने बताया शकर की कीमत में बढ़ोतरी का कारण गन्ने की पैदावार में कमी और चीनी मिलों को गन्ने का कोटा कम करना है। इस कारण भाव बढ़े हैं। दौलतगंज होलसेल किराना मर्चेंट दलाल एसोसिएशन अध्यक्ष राजेंद्र गर्ग ने बताया महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक से शकर आती है। गन्ने का कोटा कम करने से शकर की कीमत बढ़ी है।
किराना व्यवसायी मनोज तेजवानी ने बताया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के कारण रॉ मटेरियल महंगा हुआ है इस कारण ऑइल, सर्फ, साबुन, क्रीम आदि कास्मेटिक्स के भाव बढ़े हैं। ईरान युद्ध का असर सप्लाई चेन पर है, इस कारण ड्राय फ्रूट्स और विदेशी सामान की कीमतों पर असर हुआ है। बादाम 700 रुपए किलो से बढ़कर 900 रुपए तथा पिस्ता 1600 रुपए से बढ़कर 2500 रुपए किलो हो गया है।
चावल के भाव में ठहराव
भारत से चावल का निर्यात होता है। ईरान युद्ध के कारण चावल अब बाहर नहीं जा रहा है इसलिए चावल के भाव में ठहराव है। गरमी के दिनों में चावल के भावों में तेजी आती है। बरसात और ठंड के दिनों में भाव स्थिर रहते हैं।
दो दशकों में 6 से 7 गुना बढ़ गई महंगाई
बाजार के सर्वे के मुताबिक चीनी और मिठाई की कीमत 6.7 प्रतिशत तथा गैर एल्कोहलिक पेय पदार्थों की कीमत में 5.2 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है। जो पिछले 20 साल में सर्वाधिक है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार सन 2000 के मुकाबले 2026 तक दो दशक में पेट्रोल, रसोई गैस, दूध और रोजमर्रा के सामान में 4 से 6 गुना तक की वृद्धि हुई है। सन 2000 में पेट्रोल 16 रुपए लीटर था जो 2026 में 115 रुपए पहुंच गया है। इसी तरह रसोई गैस की कीमत 157 रुपए से बढ़कर 1002 रुपए हो गई है। महंगाई का सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मासिक बचत और खर्च करने की क्षमता पर पड़ा है।
किराना मर्चेंट दलाल एसोसिएशन अध्यक्ष गर्ग ने बताया दो सप्ताह पहले भी दाल, शकर, खाद्य तेल, देसी घी, वनस्पति घी तथा अन्य किराना वस्तुओं के भाव बढ़े हैं।
किसके कितने भाव बढ़े
वस्तु प्रति किलो कितने भाव बढ़े
- तुअर दाल 112 रुपए से बढ़कर 116
- चना दाल 68 रुपए से बढ़कर 72 रुपए
- उड़द दाल 112 से बढ़कर 116 रुपए
- ब्रांडेड दाल 112 से बढ़कर 125 रुपए
- सोयाबीन ऑइल 151 से बढ़कर 155 रुपए
- मूंगफली तेल 184 से बढ़कर 188 रुपए
- सनफ्लावर 15 किलो 2460 से बढ़कर 2520 रुपए
- शुद्ध घी 620 से बढ़कर 640रुपए
- लाल मिर्च 200 से बढ़कर 300 रुपए









